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गुज्जर की मौत मामले में एक और वनरक्षक गिरफ्तार

Fri, 03 Aug 2018 10:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहड़ू (शिमला)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहड़ू (शिमला) Updated Fri, 03 Aug 2018 10:32 AM IST
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police arrested one more forest guard in Gujjar's death case rohru
प्रतीकात्मक तस्वीर

जिला शिमला के रोहड़ू उपमंडल के रेशाला में गुज्जर गुलाम की हत्या मामले में वीरवार को पुलिस ने एक और आरोपी वनरक्षक को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े वनरक्षक की पहचान प्रशांत (23) पुत्र अमर सिंह निवासी नोई (रोहड़ू) के रूप में हुई है।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस हमलावरों में शामिल अब तक पांच वन रक्षकों और एक युवक की गिरफ्तारी कर चुकी है। पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है। बीते दिन पुलिस ने चार वन रक्षकों को गिरफ्तार किया था।
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भोलाड गांव के एक युवक की गिरफ्तारी 28 जुलाई को हो चुकी है।मृतक गुलाम के करीबी परिजन मुस्तू ने पुलिस को बताया कि जिस रात मारपीट हुई हमलावरों ने लकड़ी चोरी या अवैध कटान की कोई बात नहीं की।
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डेरे के पास पहुंचते ही उन्होंने सोये परिवार पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सालों से इसी जंगल में रहता आ रहा है। लोगों के बगीचों में मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं। 

हमले में शामिल थे दस से अधिक लोग

police arrested one more forest guard in Gujjar's death case rohru
demo pic

हमले वाली रात भी गुलाम भोलाड गांव के ही एक बागवान के बगीचे से काम करके लौटा था। यदि ऐसा कोई मामला होता तो बिना मारपीट किए उनकी तलाशी ले सकते थे। हमले में दस से अधिक लोग शामिल थे।

पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार करे। हमले की योजना सुनियोजित थी।  जुब्बल के थाना प्रभारी नरेश कुमार ने एक और वन रक्षक की गिरफ्तार की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि पांच वन रक्षकों समेत छह लोग गिरफ्तारी किए जा चुके हैं। पूछताछ जारी है। हमलावरों के साथ आए अन्य लोग मारपीट में शामिल नहीं थे। अगर जांच में उनकी भी संलिप्तता पाई गई तो गिरफ्तारी हो सकती है। 

सवाल : पुलिस और वन अधिकारियों को क्यों नहीं दी सूचना 

police arrested one more forest guard in Gujjar's death case rohru

क्षेत्र में चर्चा है गिरफ्तार पांचों वन रक्षकों की बीटें एक-दूसरे की बीट से कई किलोमीटर की दूरी पर हैं। सभी का एक साथ पहुंचना संदेह पैदा कर रहा है। यदि गुज्जर अवैध लकड़ी के कारोबार में संलिप्त होते तो रात दो बजे बिना

पुलिस और उच्चाधिकारियों को सूचित किए उन्होंने सो रहे परिवारों को हमला क्यों किया। बताया जा रहा है कि हमलावरों के साथ कुछ चिरानी भी थे। सवाल यह उठ रहा है कि चिरान करने वाले कश्मीरियों का वन

रक्षकों के साथ क्या कनेक्शन है जो देर रात उनके कहने पर साथ आ गए। वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। पुलिस के अधिकारियों के बयानों से भी आम लोग संतुष्ट नहीं हैं। 

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