पति के हत्या के आरोप में पत्नी समेत तीन दोषी करार, बोरी में छिपाकर नदी में फेंक दी थी लाश
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अर्पणा शर्मा की अदालत ने हत्या का आरोप साबित होने पर एक महिला समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। मामला हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले का है। आरोप था कि महिला ने दो युवकों के साथ मिलकर अपने पति को मौत के घाट उतारा और लाश बोरी में छिपाकर ब्यास नदी में फेंक दी।
अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अमर चंद उर्फ पिल्लू पुत्र शक्ति राम गांव बैहना, सतीश कुमार पुत्र प्रह्लाद भक्त निवासी गली नंबर आठ प्रीत नगर गुलाबगढ़ रोड़ डेरा बस्सी जिला मोहाली पंजाब और लता देवी पत्नी स्वर्गीय मनोज कुमार निवासी गांव बैहना को आपराधिक षड्यंत्र करके हत्या करने, पुलिस को गुमराह करने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी करार दिया।
अदालत ने आरोपी अमर चंद और सतीश कुमार को भादंसं की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा बीस हजार जुर्माना, भादंसं की धारा 201 के तहत दो साल का कारावास और पांच हजार जुर्माना, भादंसं की धारा 404 के तहत तीन साल कारावास पांच हजार जुर्माना और भादंसं की धारा 452 के तहत तीन साल कारावास और पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 33 गवाहों के बयान कलमबद्ध करवाए।
पत्नी को यह सजाएं
लता देवी को अदालत ने भादंसं की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा बीस हजार जुर्माना, भादंसं की धारा 201 के तहत दो साल का कारावास और पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
यह है मामला
जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने बताया कि 28 मई 2014 को श्याम लाल पुत्र परमा राम गांव रेहड़ा धार तहसील सदर ने थाना बल्ह में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसका छोटा भाई मनोज कुमार जो अपनी पत्नी और बेटियों के साथ बैहना गांव में रहता था, यह सभी अब वहां पर नहीं मिल रहे हैं। उसका भाई मनोज कुमार शिमला गया था जो वापस नहीं आया है और काफी तलाश करने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं चल पाया है।
श्याम लाल ने मनोज कुमार की गुमशुदगी में उसकी पत्नी लता देवी के संलिप्त होने का शक जाहिर किया। इस पर बल्ह थाना में मामला दर्ज हुआ था। छानबीन के दौरान आरोपी की निशान देही पर 7 जून 2014 को मनोज कुमार की लाश को ब्यास सतलुज लिंक नहर सुंदरनगर के नजदीक बंद बोरी में बरामद किया गया।
इस मामले की तफ्तीश तत्कालीन थाना प्रभारी मदन धीमान द्वारा की गई और जांच के बाद अदालत में चालान पेश किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से मुकदमे की पैरवी विनय वर्मा अतिरिक्त लोक अभियोजक विनय वर्मा, चाणन सिंह, नितिन कुमार और लोक अभियोजक भीष्म चंद ने की।
बहुचर्चित हूमा देवी हत्याकांड के दोषी को उम्रकैद
बहुचर्चित हूमा देवी हत्याकांड के आरोपी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी को 25 हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर के शर्मा की विशेष अदालत ने बालीचौकी तहसील के राही गांव निवासी थलिया राम उर्फ नागू के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 366, 364, 201 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम की धारा 3 के तहत अभियोग साबित होने पर क्रमश: उम्रकैद, पांच-पांच साल कठोर तथा साधारण कारावास की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
आरोपी के निश्चित समय में जुर्माना अदा न करने पर उसे छह-छह माह के अतिरिक्त कठोर और साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ हूमा देवी को अगवा करने, उसकी हत्या करने, शव को एक गुफा में दबा कर साक्ष्यों को नष्ट करने और अनुसूचित जाति की होने के कारण उस पर अत्याचार करने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उम्रकैद तथा उक्त जुर्माना राशि अदा करने का फैसला सुनाया है।
पहले दिया शादी का झांसा
अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 जनवरी 2015 को शिकायतकर्ता मणि राम ने औट पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज करवाई थी कि 1 जनवरी 2015 को वह बालीचौकी से शाम करीब 4 बजे घर पहुंचा तो घर में उसकी 25 वर्षीय अविवाहित बेटी हूमा देवी नहीं मिली। शिकायतकर्ता की पत्नी ने उन्हें बताया कि वह अपनी बहन के घर सैंज बरमारी गांव गई है।
शिकायतकर्ता ने जब अपनी बेटी हीरा देवी से इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि हूमा उसके घर नहीं आई है। इस पर शिकायतकर्ता ने अपने रिश्तेदारों के पास हूमा देवी की तलाश की लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी थलिया राम ने हूमा को शादी का झांसा दिया है जिस पर उन्होंने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।
और फिर मिला गला सड़ा शव
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की तो आरोपी ने बंशगढ़ में एक गुफा से दबाया गया हूमा देवी का गला-सड़ा शव बरामद करवाया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ तहकीकात पूरी करने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने 26 गवाहों के बयान कलमबद्ध करवा कर आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित किया।