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हिमाचल: महिला जज के उत्पीड़न पर CJM निलंबित

Thu, 02 Jul 2015 08:58 PM IST
Updated Thu, 02 Jul 2015 08:58 PM IST
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HP judge suspended over complaint of harassment.

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सीजेएम लाहौल स्पिति राजेश चौहान को निलंबित कर दिया है। सीजेएम को निलंबित कर चार्जशीट भी कर दिया गया है। चार्जशीट में इस न्यायिक अधिकारी पर मिसकंडक्ट का आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने से पहले सीजेएम को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

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हाईकोर्ट ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया है, जो मामले की जांच करेगी। यह कमेटी दोनों पक्षों को सुनेगी और इसकी जांच रिपोर्ट दो माह में हाईकोर्ट को सौंपेगी। मनाली में ड्रग एब्यूज के मुद्दे पर 11-13 जून को आयोजित नेशनल कांफ्रेंस के दौरान दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत महिला जज ने की थी।
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'रिजॉर्ट में ले जाने के लिए जबरदस्ती की'

HP judge suspended over complaint of harassment.

महिला जज ने अपनी शिकायत में कहा था कि सीजेएम ने उन्हें एक रिजॉर्ट में ले जाने के लिए जबरदस्ती की। इसके अलावा कांफ्रेंस के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया। सीजेएम उन्हें रिजॉर्ट में ले चलने के लिए दबाव डालते रहे। शिकायत प्राप्त होने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश से करवाई।

इसके आधार पर हाईकोर्ट ने केलांग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को निलंबित कर हेडक्वार्टर कुल्लू निर्धारित कर दिया और महिला जज को शिमला से सोलन तब्दील किया गया है। दोनों ही अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ लिखित शिकायत की है।

'सुप्रीम कोर्ट के जज करें जांच'

HP judge suspended over complaint of harassment.

बार एसोसिएशन कुल्लू सस्पेंड जज के बचाव में आ गई है। मामला सामने आने के बाद गुरुवार को बार एसोसिएशन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाकर प्रस्ताव पारित किया है कि इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की देखरेख में छानबीन होनी चाहिए, जिससे मामले की निष्पक्षता से जांच हो सके। कुल्लू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश आचार्य का कहना है कि बार एसोसिएशन ने एक आपात बैठक का आयोजन किया।

इसमें प्रस्ताव पारित किया गया है कि इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की ओर से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। मामला क्या है? इसका पूरी तरह से खुलासा नहीं हुआ है। लिहाजा, न्यायिक व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रखने के लिए इस मामले की निष्पक्ष जांच करवानी जरूरी है।

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