नेता पर लगे धमकाने के आरोप, डॉक्टर को दी ट्रांसफर की धमकी
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हिमाचल के बिलासपुर जिला अस्पताल के डॉक्टर ने विधायक बंबर ठाकुर पर धमकाने का आरोप लगाया है। आरोप है कि विधायक ने बात न मानने पर केलांग ट्रांसफर करने की धमकी दी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जसबीर सिंह ने कहा कि सदर विधायक ने उन्हें एक व्यक्ति की अपंगता बढ़ाने का दबाव बनाया।
क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में पत्रकार वार्ता में डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे सदर विधायक ने फोन किया और कहा कि मैंने जिस व्यक्ति को अपंगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए भेजा था, उसका अपंगता प्रमाण पत्र 60 प्रतिशत ही बनाया है।
आप किसी को टांग कटने पर 60 प्रतिशत तो किसी को 80 प्रतिशत अपंगता प्रमाण पत्र देते हो। इस पर विधायक को बताया कि अपंगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस की गाइड लाइन हैं। उसके अनुसार ही अपंगता का प्रमाण पत्र बनाकर दिया जाता है।
विधायक बोले, आपको पसंद नहीं घर के पास की रोटियां
घुटने से नीचे टांग कटने पर 60 प्रतिशत और उसके ऊपर टांग कटने पर 80 प्रतिशत अपंगता प्रमाणपत्र बनाकर दिया जाता है। जवाब में विधायक ने कहा कि मुझे नॉर्मस का पता है। आप एक लाख सैलरी लेते हो और ऊपर से कमीशन अलग से लेते हो।
आपको घर के नजदीक की रोटियां पसंद नहीं आ रही हैं। आपकी ट्रांसफर केलांग ही करनी पड़ेगी। वहीं मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन बिलासपुर के प्रधान डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि डॉक्टर को सैलरी उसकी काबलियत के आधार पर मिलती है।
डॉक्टर दिन-रात काम कर रहे हैं। इस मामले को लेकर प्रदेश एसोसिएशन से बात की जा रही है। प्रदेश कार्यकारिणी के निर्देशानुसार आगामी रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने इस मामले की लिखित शिकायत सीएमओ, निदेशक हेल्थ, सेक्रेटरी हेल्थ और मुख्यमंत्री को भेज दी है।
डॉक्टर के आरोपों पर विधायक ने दी ये सफाई
बंबर ठाकुर ने कहा कि उनके पास कंदरौर निवासी श्याम लाल डॉक्टर की शिकायत लेकर आया था। श्यामलाल ने बताया कि डॉ. जसबीर सिंह ने पिछले महीने उसका 35 प्रतिशत अपंगता का प्रमाण पत्र बनाया था। मगर दोबारा मेडिकल बोर्ड में इसी डॉ. ने उसका अपंगता प्रमाण बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया।
श्यामलाल ने लिखित प्रार्थना पत्र में डॉ. को कहा कि उसकी एक टांग कट चुकी है, जिस कारण उसकी अपंगता 60 प्रतिशत से अधिक है। इस पर डॉ. जसबीर सिंह ने 60 प्रतिशत से अधिक का अपंगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए श्यामलाल से 20 हजार देने की मांग की।
क्योंकि 60 फीसदी से अधिक अपंगता पर सरकार प्रभावित को दो लाख रुपये देती है। इस पर मैंने डॉक्टर से इस बारे में फोन कर पूछा। मगर डॉक्टर से स्थिति साफ करने की बजाय यहां तक कह दिया कि मेरी ट्रांसफर करवा दो। वह लोगों के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और लोगों की समस्याओं को लेकर किसी भी अधिकारी से कारण पूछता कोई गलत बात नहीं हैं।