साइबर थाने में फिर से दर्ज हो सकेंगे ऐसे मामले, पुलिस मुख्यालय ने दी मंजूरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साइबर ठगी से संबंधित मामलों के निपटाने को लेकर राज्य पुलिस मुख्यालय ने नया फैसला लिया है। प्रदेश के पहले साइबर थाने में एक बार फिर से साइबर ठगी से संबंधित मामले दर्ज हो सकेंगे। पुलिस महानिदेशक सीताराम मरडी ने सीआईडी और साइबर सेल के अधिकारियों के साथ बैठक कर एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी दे दी है।
प्रदेश में लगातार बढ़ते साइबर अपराध के ग्राफ और उससे निपटने में स्थानीय पुलिस की अक्षमता को देखते हुए डीजीपी ने यह निर्णय लिया है। अब इस फैसले के बाद साइबर थाने में पांच लाख से ज्यादा की रकम की साइबर ठगी होने पर ही केस दर्ज हो सकेगा।
इसके अलावा सरकारी वेबसाइट या सरकारी तंत्र से साइबर अपराध, देश या प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा, सोशल मीडिया पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयास जैसे मामलों में ही सीधे तौर पर साइबर सेल कार्रवाई करेगा।
ऐसे भेज सकेंगे साइबर ठगी संबंधी शिकायतें
पांच लाख से कम की ठगी वाले मामलों में साइबर सेल स्थानीय थानों को शिकायत भेज देंगे और जांच में तकनीकी सहयोग देगा। पूर्व डीजीपी संजय कुमार और फिर सोमेश गोयल के कार्यकाल के दौरान नियमों का हवाला देते हुए साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी गई थी।
लेकिन साइबर थाने के पक्ष में खड़े अफसर उसकी स्थापना और उसके बाद बने नियमों का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी रखने के पक्ष में थे। इधर, सूबे में लगातार साइबर अपराध के मामले बढ़ते जा रहे थे।
नए डीजीपी मरडी के पदभार संभालने के बाद साइबर सेल के अधिकारियों ने एक बार फिर उनके सामने यह पक्ष रखा। लोगों की समस्या और बढ़ते अपराध को देखते हुए डीजीपी ने फिर से साइबर सेल के थाने में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।