80 लाख के गबन केस में चार्जशीट होंगे संजौली कॉलेज के 3 पूर्व प्रिंसिपल
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हिमाचल के एकमात्र एक्सीलेंस कॉलेज संजौली के तीन पूर्व प्रिंसिपलों सहित तीन प्रवक्ताओं को चार्जशीट करने की तैयारी पूरी हो गई है। कॉलेज में हुए 80 लाख के गबन मामले में उच्च शिक्षा निदेशालय ने सरकार से चार्जशीट करने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी मांगी है।
इसके बाद पूर्व प्रिंसिपलों और प्रवक्ताओं से रिकवरी की जाएगी। दो पूर्व प्रिंसिपल इन दिनों उच्च पदों पर तैनात हैं, जबकि एक प्रिंसिपल की सेवानिवृत्ति हो चुकी है। मामले के मुख्य आरोपी कॉलेज के अधीक्षक को शिक्षा विभाग पहले ही चार्जशीट कर चुका है।
शिमला स्थित एक्सीलेंस कालेज संजौली में 80 लाख का गबन हुआ है। कॉलेज के विभिन्न बिलों की अदायगी, सामान की खरीद और ग्रांट में यह गोलमाल किया गया है। कॉलेज के सीनियर असिस्टेंट पर गबन करने का आरोप है।
उच्च शिक्षा निदेशालय के ज्वाइंट कंट्रोलर वित्त की जांच रिपोर्ट में इसका स्पष्ट तौर पर उल्लेख है। ढाई साल से कैश बुक नहीं भरने की शिकायत मिलने पर शिक्षा निदेशालय ने मई महीने में मामले की जांच के आदेश दिए थे।
जांच के बाद हुए थे सनसनीखेज खुलासे
प्रारंभिक जांच के दौरान ही सीनियर असिस्टेंट को सस्पेंड कर दिया था। सरकारी धनराशि के इस घोटाले में कॉलेज के कई अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता का अंदेशा भी जांच रिपोर्ट में जताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक शिमला स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉलेज संजौली में बीते ढाई साल से कैश बुक नहीं भरी गई।
कॉलेज प्रशासन की ओर से की गई विभिन्न सामान की खरीद, हॉस्टल फीस, विभिन्न बिलों की अदायगी और सरकार से मिली ग्रांट का कहीं भी कोई ब्योरा नहीं रखा गया है। जांच के दौरान 80 लाख रुपये के गोलमाल की बात सामने आई है।
संभावना जताई जा रही है कि मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी जा सकती है। मामले में कॉलेज के डीडीओ पावर वाले कई अफसरों सहित पूर्व प्रिंसिपलों पर शिकंजा कसना तय है। डीडीओ पावर वाले अफसरों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
नियमानुसार कॉलेज प्रशासन को हर खरीद का कैश बुक में ब्योरा देना पड़ता है। बजट कहां से आया, बजट को कहां-कहां खर्च किया गया। इसकी पूरी जानकारी कैश बुक में होनी चाहिए, लेकिन ढाई साल तक कैश बुक भरी ही नहीं गई। कॉलेज के प्रिंसिपलों ने भी इसकी अनदेखी की।