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घंटा चोरी मामले में सीबीआई को मिले अहम सुराग

Mon, 09 May 2016 11:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 09 May 2016 11:10 AM IST
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cbi investigation in antique bell stolen from iias shimla
एडवांस्ड स्टडी चोरी हुआ बेशकीमती घंटा। - फोटो : फाइल फोटो

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) से साल 2010 में संदिग्ध हालात में करीब 30 किलोग्राम के घंटा चोरी प्रकरण में जांच कर रही सीबीआई के हाथ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। सूत्रों के अनुसार मामले में टीम ने मणिपुर और मुंबई में पड़ताल के बाद हाल ही में पटियाला में भी दबिश दी थी। इसके बाद चोरी से संबंधित कुछ सुराग टीम के हाथ लगे हैं।

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इससे पहले पिछले महीने टीम ने शिमला में एक सिक्योरिटी एजेंसी और संस्थान के अधिकारियों से पूछताछ की थी। सीबीआई की जांच 2013 से चल रही है। पहले शिमला पुलिस ने चोरी की एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की, लेकिन तीन साल की जांच में भी पुलिस के हाथ खाली रहे। इसके बाद सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी।
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चूंकि घटना को बीते तीन साल से ज्यादा का समय बीत गया था, इसलिए सीबीआई को जांच में कड़ी से कड़ी मिलाने में समय लग रहा है। यह घंटा 2010 में चोरी किया गया था। अष्टधातु से बना यह घंटा बेशकीमती बताया जाता है। इसकी कीमत अरबों में आंकी गई है। करीब 40 किलो का यह घंटा कड़ी सुरक्षा के बावजूद चोरी हो गया था।
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इसके बाद से यहां के सुरक्षाकर्मी भी संदेह के दायरे में रहे हैं। जानकारों के अनुसार साल 1903 में 30 किलोग्राम के दुर्लभ धातु से बने इस घंटे को नेपाल के राजा ने तत्कालीन वायसराय को भेंट किया था। पुरातन अद्भुत कला से सुसज्जित घंटा संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाया गया था। यह घंटा 50 से 60 किलोग्राम की लकड़ी की फ्रेम में जड़ा गया था।


इस घंटे पर नेपाली भाषा में भेंट देने की तारीख को अंकित किया गया था। 21 अप्रैल 2010 की रात को इस घंटे की चोरी हो गई थी। इसके बाद बालूगंज पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज की गई। हालांकि, रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस हरकत में आई, मगर 7 दिसंबर 2013 तक चोरी करने वालों का सुराग नहीं लगा। इसके बाद सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी।

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