मरीजों का फर्जी ऑपरेशन कर लाखों डकार गए ये डाक्टर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नर्सिंग होम चलाने वाली डाक्टर दंपति द्वारा लाखों की धोखाधड़ी के मामले में विजिलेंस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सोलन अस्पताल में इस मामले में सात मरीजों के मेडिकल किए गए हैं।
जांच के दौरान आपरेशन फर्जी निकले हैं। वीरवार को स्वास्थ्य विभाग और विजिलेंस की टीम ने सोलन अस्पताल में रिकार्ड चैक किए। विजिलेंस ने जांच में यह भी पाया है कि आपरेशन के सहारे डाक्टर दंपति ने इंश्योरेंस कंपनी से करीब नौ लाख की रकम अपने खाते में जमा कर ली है।
यही नहीं नवजीवन नर्सिंग होम में दाखिल मरीजों से भी पैसे की अवैध वसूली की गई है, जबकि योजना के तहत संबंधित परिवार से यह वसूली नहीं की जा सकती है।
2012 में दर्ज हुआ था मामला
विजिलेंस थाना सोलन में डा. एसआर शर्मा और उसकी पत्नी के खिलाफ वर्ष 2012 में आईपीसी की धारा 420/467/468/477/12बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच का जिम्मा प्रबल चौहान को दिया गया। जांच आगे बढ़ाते हुए टीम के हाथ यह सफलता लगी है। डाक्टर सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
बिलासपुर के बरमाणा में विजिलेंस ने आरएसबीवाईए का मामला पकड़ा। इसमें लाखों का फर्जीवाड़ा निकला। आला अधिकारियों ने इसकी छानबीन पूरे प्रदेश में करवाई। इसमें सोलन जिला में भी यह फर्जीवाड़ा निकला।
यह है आरएसबीवाई योजना
इस योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाते हैं। एक परिवार सालाना तीस हजार तक का स्वास्थ्य लाभ ले सकता है। वहीं अगर आपरेशन का मामले में केस रेफर हो तो 1.75 लाख रुपए तक का लाभ सरकार से लिया जा सकता है।
ऐसे की शातिरगिरी
आरोपी दंपति के नर्सिंग होम को इस योजना के तहत अधिकृत किया गया। विजिलेंस का दावा है कि इस योजना के तहत आने दाखिल होने वाले मरीजों से हजारों रुपये अवैध रूप से वसूले गए हैं।
वहीं फर्जी परिवार के सदस्यों के फर्जी आपरेशन बताकर न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को तीन सालों से करीब 98 लाख के बिल क्लेम किए गए। इसके एवज में नौ लाख की राशि डकारी गई।