हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड में करोड़ों का गोलमाल
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1800 करोड़ के घाटे में चलने वाला हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड में करोड़ों का गड़बड़झाला सामने आया है। बिना किसी जायज मांग और जरूरत के ढाई साल पहले पांच करोड़ रुपये से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक मीटर खरीद लिए, इनका आज तक इस्तेमाल नहीं किया गया।
यह इलेक्ट्रानिक मीटर बोर्ड के मीटर टेस्टिंग स्टोरों में पड़े-पड़े खराब रहे हैं। इन मीटरों का वारंटी पीरियड भी खत्म हो चुका। अब जब निचले स्तर के अफसरों की भेजी रिपोर्ट सामने आई तो हल्ला मचाना शुरू किया।
अमर उजाला को मिले दस्तावेजों के अनुसार बोर्ड के जुलाई 2012 से लेकर मार्च 2013 तक तत्कालीन मुख्य अभियंता (एमएम) के स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की खरीदारी की गई।
पहले मंगवाए, अब बेकार कर दिए
उस समय दर्शाया गया कि शिमला, सोलन और नाहन सर्किल में इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की जरूरत है। उस जरूरत को ध्यान में रखकर आठ हजार से अधिक मीटर मंगवाए गए, लेकिन वास्तव में फील्ड में इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की जरूरत ही नहीं थी।
यही कारण रहा कि इन इलेक्ट्रॉनिक मीटरों को उक्त तीनों ही सर्कलों में आज तक नहीं लगवाया गया। ये सभी मीटर सोलन स्थित मीटर टेस्टिंग स्टोर में सड़ रहे हैं। नवंबर 2014 में इनका गारंटी/वारंटी पीरियड भी समाप्त हो चुका है।
ये आठ हजार मीटर 2.65 करोड़ रुपये में खरीदे गए थे। इसके अलावा तकरीबन इतने ही मीटर प्रदेश में फील्ड स्तर पर सड़ रहे हैं, जिनकी कीमत ढाई करोड़ से अधिक है।
ऐसे हुआ खुलासा
सूत्रों का कहना है कि हाल ही में किए गए ऑडिट में बिजली बोर्ड प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। इसी के बाद बोर्ड के नीचे के अधिकारियों ने पूरे मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। इसके बाद ही इस करोड़ों की लापरवाही का खुलासा हुआ है।
भाजपा कार्यकाल में खरीदारी
पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य विद्युत बोर्ड प्रबंधन की ओर से करोड़ों रुपये के इलेक्ट्रॉनिक मीटर की खरीदारी की गई है। ये मीटर किसके दबाव में खरीदे गए थे, इसकी उच्च स्तरीय जांच करने के बाद ही तसवीर सामने आ पाएगी।
प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी का कहना है कि करोड़ों के इलेक्ट्रॉनिक मीटर खरीदकर इनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया जांच कराने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। वहीं विद्युत बोर्ड के निदेशक वित्त राजीव शर्मा का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक मीटरों का मामला मेरे संज्ञान में आया है। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जा रही है।