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इक्डोल प्रोस्पेक्टस घोटाले में पुलिस ने एचपीयू से तलब की ऑडिट रिपोर्ट

Sat, 12 Jan 2019 11:29 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 12 Jan 2019 11:29 AM IST
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Audit Report summoned from HPU shimla in ICDEOL prospectus scam

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र (इक्डोल) में करीब एक करोड़ प्रोस्पेक्टस बिक्री के घोटाले में पुलिस ने विवि से ऑडिट रिपोर्ट तलब की है। इसके आधार पर ही आगामी कार्रवाई होगी।

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एक करोड़ 11 लाख 67 हजार के इस घोटाले में कई अधिकारी नप सकते हैं। ऐसे में विवि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी घोटाले की राशि में से 15 लाख रुपये विवि प्रशासन को लौटा चुका है। 
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प्रदेश विवि के कुलसचिव घनश्याम चंद की शिकायत पर बालूगंज थाने में आरोपी अनुभाग अधिकारी बाबूराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विवि प्रशासन ने आरोपी कर्मचारी को 16 नवंबर को निलंबित कर दिया था।
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साथ ही निदेशक इक्डोल की अध्यक्षता में आंतरिक जांच कमेटी बनाई थी। इसकी रिपोर्ट में प्रोस्पेक्टस बिक्री में करीब एक करोड़ 11 लाख 67 हजार का गोलमाल करने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि पिछले सात साल से गड़बड़झाले को अंजाम दिया जा रहा था। जिला शिमला के कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक मनमोहन ने कहा कि हर पहलू पर जांच की जा रही है। मौजूदा समय में प्रदेश विश्वविद्यालय से मामले से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई है। 

ऑडिट में सामने आया था प्रोस्पेक्टस घोटाला 

Audit Report summoned from HPU shimla in ICDEOL prospectus scam

इक्डोल के नवंबर में किए गए ऑडिट में एजी की टीम ने ऑडिट पैरा में प्रोस्पेक्टस बिक्री में घोटाले की रिपोर्ट बनाकर विवि को लिखित में सूचित किया। पैरा में एजी टीम ने 2011 से पूर्व कर्मी की सीट पर तैनाती के दौरान भी प्रोस्पेक्टस बिक्री की राशि में गड़बड़ी का पता लगाने को अपने स्तर पर जांच करने के लिए कहा। इसके बाद कुलसचिव ने आरोपी को निलंबित कर दिया और इक्डोल निदेशक  की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। कमेटी ने कुलसचिव को सौंपी रिपोर्ट में कर्मी बाबूराम को जिम्मेदार माना। 

काउंटर पर 2011 से तैनात था आरोपी  
कुलसचिव की शिकायत के मुताबिक आरोपी कर्मचारी इक्डोल के प्रोस्पेक्टस काउंटर पर 2011-12 से 2017-18 तक तैनात था। इस दौरान प्रोस्पेक्टस की सेल में 1 करोड़ 11 लाख 67 हजार का घोटाला किया। प्रोस्पेक्टस की छपाई, बिक्री से लेकर इसकी आय बैंक में जमा करवाने तक की प्रक्रिया में बहुत से लोग शामिल होते हैं। यूनिवर्सिटी का अपना लोक ऑडिट विभाग भी है, जो हर साल ऑडिट करता है। सवाल उठता है कि एलएडी की नजर में यह एक करोड़ का घोटाला क्यों सामने नहीं आया? 

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