अंग्रेजों के जमाने की 100 साल पुरानी अष्टधातु की लक्ष्मी मूर्ति चोरी
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धर्मशाला के योल के समीप सिद्धपुर में सोमवार रात करीब दो बजे एक घर की दीवार फांदकर चोर आंगन में स्थापित मंदिर से अंग्रेजों के जमाने की अष्टधातु की लक्ष्मी माता की मूर्ति उड़ा ले गए। दावा किया जा रहा है कि यह मूर्ति करीब 100 साल पुरानी है। वारदात करमापा मठ के समीप स्थित शंभू नाथ शर्मा के घर अंजाम दी गई। एसपी अभिषेक दुल्लर ने बताया कि मामला दर्ज कर चोरों की तलाश की जा रही है।
शंभू के बेटे अरविंद शर्मा ने बताया कि उनके पिता रात दो बजे घर के आंगन में बने शौचालय में जाने के लिए बाहर आए तो मंदिर का दरवाजा खुला देखा। अंदर जाकर देखा तो मूर्ति गायब थी। तत्काल योल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने रात को ही पहुंचकर मौके का जायजा लिया। मंदिर में चांदी के बर्तन और अन्य वस्तुएं रखी हुई थीं लेकिन चोर सिर्फ मूर्ति ले गए। हालांकि मूर्ति के ऊपर लगाए गए चांदी के 2 छत्र, एक पायल और हार रास्ते में पड़े मिले।
आजादी से पूर्व की है मूर्ति
अरविंद ने बताया कि यह मूर्ति उनके नाना गजाधर शर्मा ने स्थापित करवाई थी। यह मूर्ति आजादी से पूर्व धर्मशाला आर्मी कैंट में उस समय गोरखा राइफल जीआर के एक ट्रेनिंग कैंप में स्थापित की गई थी। बतौर धार्मिक अध्यापक गजाधर शर्मा इस मूर्ति की देखभाल और पूजा करते थे। कैंप शिफ्ट होने के बाद अंग्रेज अफसर इस मूर्ति को गजाधर शर्मा को देखभाल के लिए सौंप गए।
गजाधर शर्मा ने मूर्ति की स्थापना अपनी बेटी के घर में कर दी। अरविंद ने बताया कि उनके घर में दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में मंदिर में वर्षों से विशेष पूजा उत्सव आयोजित किया जाता है। इसमें भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। लोगों के लिए इस मूर्ति के लिए विशेष धार्मिक महत्व और आस्था है।