दसवीं की छात्रा से किया था दुराचार, सलाखों के पीछे कटेंगे 20 साल
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दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा स्कूल जा रही थी कि दो दरिंदों ने उसे गाड़ी में अगवा कर लिया। दोनों ने उसके साथ दुराचार किया था। मामला हिमाचल के कुल्लू जिले का है। जिला कुल्लू की स्पेशल अदालत ने शनिवार को दुराचार के आरोप साबित होने पर दो लोगों को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
स्पेशल जज प्रेम पाल रांटा की अदालत ने बंजार के कलियूनी के रविंद्र शर्मा उर्फ रवि तथा बीरबल निवासी घरटगाड़ को नाबालिग छात्रा के साथ दुराचार करने पर यह सजा सुनाई है। मामले की पैरवी कर रहे उप न्यायवादी जितेंद्र कुमार गोस्वामी ने कहा कि दोनों आरोपियों पर आरोप साबित होने पर अदालत ने पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल की सजा के अलावा अन्य धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है।
वहीं, विभिन्न धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया गया है। गोस्वामी ने कहा कि मामला 9 अक्तूबर 2013 का है। जब दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा स्कूल जा रही थी। इसी दौरान उपरोक्त दोनों आरोपियों ने स्कूल के करीब एक किमी पहले छात्रा को गाड़ी में अगवा किया और कुछ दूरी पर ले जाकर उससे दुराचार किया और डराया-धमकाया।
आरोपियों ने छात्रा को किसी को बताने पर इसके गंभीर परिणाम भुगतने की भी धमकी दे डाली थी। उन्होंने कहा कि मामले में उनकी ओर से 13 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। केस का ठोस पक्ष रखने पर प्रेम पाल रांटा की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को 20 साल की कठोर सजा सुनाई है।
जंगल में कॉलेज छात्रा से दुराचार के दोषी को 10 साल जेल
मंडी। कॉलेज की छात्रा से दुराचार के आरोपी को अदालत ने दस साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी के जुर्माना राशि समय पर अदा न करने की सूरत में दो साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (दो) कृष्ण कुमार के न्यायालय ने मंडी जिला की चच्योट तहसील के शाला गांव निवासी संदीप कुमार पुत्र राजेंद्र कुमार के खिलाफ भादंस की धारा 376 के तहत दुराचार का अभियोग साबित होने पर उसे उक्त सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता ने गोहर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी कि 25 जुलाई 2013 को वह कालेज में गई हुई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे कालेज परिसर में रोक कर बात करनी चाहिए, लेकिन वह क्लास में चली गई। कॉलेज से छुट्टी के बाद पीड़िता बस से उतरकर जंगल के रास्ते घर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में छिपे आरोपी ने उसे पकड़ कर जबरन दुराचार किया।
इसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। पीड़िता ने घर पहुंचकर परिजनों को इस घटना के बारे में बताया। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए लोक
अभियोजक कुलभूषण गौतम ने 30 गवाहों के माध्यम से आरोपी पर अभियोग साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ दुराचार का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।