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Delhi NCR News: पड़ोसी बने सहारा, घायलों को पहुंचाया अस्पताल
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एंबुलेंस का इंतजार किए बिना मदद को आगे आए लोग, परिजनों के आने तक अस्पताल में रहे साथ
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। सीमापुरी में इमारत हादसे में घायल लोगों के लिए उस वक्त पड़ोसी सबसे पहले सहारा बने। किसी ने घायलों को मलबे से निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया, किसी ने पानी पिलाया तो किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई। कई घायलों के परिजन मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में पड़ोसी ही उनके लिए परिवार की तरह खड़े नजर आए।
हादसे के बाद इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। हर कोई मलबे की ओर देख रहा था और अपनों की सलामती की जानकारी लेने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने घायलों को संभालने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कुछ लोग घायलों के साथ अस्पताल भी गए, ताकि इलाज शुरू कराने में देरी न हो।
एंबुलेंस का नहीं किया इंतजार
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की थी। गंभीर रूप से घायल लोगों को आसपास के लोगों ने संभाला। कुछ पड़ोसियों ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय उपलब्ध साधनों से उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना था कि ऐसे हादसों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
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अस्पताल पहुंचकर भी नहीं छोड़ा साथ
घायलों के राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचने के बाद भी कई पड़ोसी उनके साथ रहे। कई घायलों के परिवार का कोई सदस्य अस्पताल नहीं पहुंचा था। ऐसे में पड़ोसियों ने अस्पताल के कर्मचारियों को उनकी जानकारी दी और परिजनों के आने तक जरूरी मदद की।
पहचान से पहले इंसानियत को दी प्राथमिकता
पड़ोसियों की भूमिका इसलिए भी खास रही क्योंकि मदद करने वालों में ज्यादातर लोग घायल परिवारों के करीबी रिश्तेदार नहीं थे। किसी ने यह नहीं पूछा कि घायल कौन है या उससे उसका क्या रिश्ता है। जरूरत देखकर लोग आगे आए और अपनी क्षमता के अनुसार मदद की। हादसे ने यह भी दिखाया कि आपदा की घड़ी में प्रशासन और बचाव दल के साथ स्थानीय लोगों की तत्परता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। सीमापुरी में इमारत हादसे में घायल लोगों के लिए उस वक्त पड़ोसी सबसे पहले सहारा बने। किसी ने घायलों को मलबे से निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया, किसी ने पानी पिलाया तो किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई। कई घायलों के परिजन मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में पड़ोसी ही उनके लिए परिवार की तरह खड़े नजर आए।
हादसे के बाद इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। हर कोई मलबे की ओर देख रहा था और अपनों की सलामती की जानकारी लेने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने घायलों को संभालने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कुछ लोग घायलों के साथ अस्पताल भी गए, ताकि इलाज शुरू कराने में देरी न हो।
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एंबुलेंस का नहीं किया इंतजार
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की थी। गंभीर रूप से घायल लोगों को आसपास के लोगों ने संभाला। कुछ पड़ोसियों ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय उपलब्ध साधनों से उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना था कि ऐसे हादसों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
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अस्पताल पहुंचकर भी नहीं छोड़ा साथ
घायलों के राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचने के बाद भी कई पड़ोसी उनके साथ रहे। कई घायलों के परिवार का कोई सदस्य अस्पताल नहीं पहुंचा था। ऐसे में पड़ोसियों ने अस्पताल के कर्मचारियों को उनकी जानकारी दी और परिजनों के आने तक जरूरी मदद की।
पहचान से पहले इंसानियत को दी प्राथमिकता
पड़ोसियों की भूमिका इसलिए भी खास रही क्योंकि मदद करने वालों में ज्यादातर लोग घायल परिवारों के करीबी रिश्तेदार नहीं थे। किसी ने यह नहीं पूछा कि घायल कौन है या उससे उसका क्या रिश्ता है। जरूरत देखकर लोग आगे आए और अपनी क्षमता के अनुसार मदद की। हादसे ने यह भी दिखाया कि आपदा की घड़ी में प्रशासन और बचाव दल के साथ स्थानीय लोगों की तत्परता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।