Himachal CPS: सुप्रीम कोर्ट से सुक्खू सरकार को बड़ी राहत, बरकरार रहेगी CPS पद से हटाए 6 विधायकों की सदस्यता
प्रदेश सरकार को सीपीएस मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पूर्व सीपीएस विधायक पद पर बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सीपीएस रहे विधायक अयोग्य घोषित नहीं होंगे।
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हिमाचल हाईकोर्ट की ओर से हटाए गए छह मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की विधानसभा की सदस्यता नहीं जाएगी। कांग्रेस के ये नेता विधायक बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल की कांग्रेस सरकार को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की पीठ ने सीपीएस नियुक्त किए विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने के हाईकोर्ट के निर्देश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा कि इस बीच विधायकों को सीपीएस नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा है कि अगर ऐसी नियुक्तियां की गईं तो उन्हें अवैध माना जाएगा। नोटिस जारी करते हुए अदालत ने प्रतिवादियों को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद दो हफ्ते के भी सरकार अपना जवाब दायर करेगी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा है कि अब सीपीएस से जुड़ी अलग-अलग राज्यों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी। मामले की आगामी सुनवाई 20 जनवरी 2025 को होगी। गौर हो कि सुक्खू सरकार ने अर्की विधानसभा क्षेत्र से विधायक संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल को सीपीएस नियुक्त किया था।
हिमाचल सरकार की ओर से हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें विधायकों को सीपीएस नियुक्त करने की अनुमति देने वाले 2006 के राज्य के कानून को निरस्त कर दिया था। प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सरकारों के निर्णयों से जुड़े तथ्य रखते हुए कहा कि इस तरह के मामले शीर्ष अदालत के समक्ष पहले से लंबित हैं। दूसरे पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने सीपीएस पद से हटाए विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही पर रोक का विरोध करते हुए कहा कि इससे पहले शीर्ष अदालत ने 2022 में मणिपुर सरकार द्वारा पारित इसी तरह के कानून को रद्द किया था।
कपिल सिब्बल ने यह दी दलील
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की ओर से 13 नवंबर को सीपीएस पर दिए गए फैसले का पैरा नंबर 50 अवैध और तर्कपूर्ण है। हाईकोर्ट ने इसमें कुछ भी साफ तौर पर नहीं कहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि सीपीएस कानून की वैधता के सुप्रीम कोर्ट में और भी मामले लंबित हैं, जिन पर सुनवाई होनी है। सरकार और अन्य सीपीएस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, आनंद शर्मा, मुकुल रोहतगी और हिमाचल सरकार के महाधिवक्ता अनूप रतन और देवन खन्ना भी पेश हुए।
हाईकोर्ट ने 13 नंबर को निरस्त कर दिया था सीपीएस कानून
हिमाचल हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को सीपीएस कानून 2006 को असांविधानिक घोषित किया था। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्य अयोग्यता अधिनियम 1971 की धारा 3 (डी) को भी असांविधानिक करार दिया। इसके तहत सीपीएस पद को संरक्षण दिया गया था। फैसले के पैरा 50 के तहत विधायकों की सदस्यता को लेकर प्रदेश में संशय बन गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पैरा 50 पर स्पष्ट की स्थिति, विधायक बने रहेंगे
सरकार की ओर से जो कानून बनाया गया है, वह 1950 की कन्वेंशन पर आधारित है। शीर्ष अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि जजमेंट का पैरा 50 गलत है। प्रदेश में जो छह सीपीएस बनाए गए थे, उनकी विधानसभा की सदस्यता बनी रहेगी। शीर्ष अदालत में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों की याचिकाएं काफी समय से लंबित पड़ी हैं। इन सभी की सुनवाई अब एक साथ होगी- अनूप रतन, महाधिवक्ता, हिमाचल सरकार
महाधिवक्ता अनूप कुमार रतन ने ये कहा
महाधिवक्ता अनूप कुमार रतन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मुख्य संसदीय सचिव के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता से संबंधित कार्रवाही पर रोक लगाते हुए कहा कि इस संबंध में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। रतन ने कहा, "हमने कोर्ट को यह भी आश्वासन दिया है कि निकट भविष्य में सीपीएस के लिए कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी।" बता दें, हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के 18 वर्ष पुराने सीपीएस कानून 2006 को अवैध-असांविधानिक करार दिया है।
VIDEO | "In the matter of the Chief Parliamentary Secretary issue in Himachal Pradesh, the Supreme Court today stayed the proceedings regarding the disqualification of the MLAs, stating that no further action in this regard will be taken. We have also assured the court that no… pic.twitter.com/C1yiCN7xmK
— Press Trust of India (@PTI_News) November 22, 2024
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद छह विधायकों अर्की से संजय अवस्थी, दून से राम कुमार चौधरी, पालमपुर से आशीष बुटेल, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा, बैजनाथ से किशोरी लाल और कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर को मुख्य संसदीय सचिव के पद से हटना पड़ा है। शीर्ष अदालत में सरकार की ओर दायर याचिकाओं में कहा गया है कि मुख्य संसदीय सचिव और संसदीय सचिव के पद 70 वर्षों से भारत और 18 सालों से हिमाचल में हैं। याचिका में दलील दी गई है कि हिमाचल सरकार ने गुड गवर्नेंस और जनहित के कार्यों के लिए सीपीएस नियुक्त किए थे।
फैसले का स्वागत, विधि विशेषज्ञों की राय से ही आगे बढ़ेंगे: सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कानून को परिभाषित किया है। अनुच्छेद 50 की व्याख्या उससे मेल नहीं खाती। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष केस लगा था, फैसले का स्वागत है। अब हम आगे उठाए जाने वाले कदमों पर विचार-विमर्श करेंगे। विधि विशेषज्ञों की राय से आगे बढ़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष अफवाह फैलाकर लोगों का ध्यान बांटने की कोशिश कर रहा है।
दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचकर मीडिया से सीएम ने कहा कि भाजपा के नेता बचकानी बातें कर रहे हैं। कभी समोसे की चर्चा करते हैं तो कभी टॉयलेट टैक्स की। जबसे कांग्रेस के विधायकों की संख्या दोबारा 40 पहुंची है, तबसे मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर मेरे इस्तीफे की पेशकश करने की खबरें चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी के मुद्दे उठाने चाहिएं। उधर, वीरवार शाम को दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के साथ देर रात तक मुख्य संसदीय सचिवों के मामले को लेकर चर्चा की। शुक्रवार सुबह भी कोर्ट की सुनवाई से पहले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच बैठक हुई। दोपहर बाद मुख्यमंत्री दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचे। शनिवार दोपहर को मुख्यमंत्री शिमला आएंगे।
VIDEO | "The Supreme Court has defined the law in this matter. The interpretation of paragraph 50 did not align with it. Today, what was presented before the Supreme Court has brought relief, and we will now deliberate on the next steps to be taken," says Himachal Pradesh CM… pic.twitter.com/SMGAV9nkkI
— Press Trust of India (@PTI_News) November 22, 2024
शीर्ष अदालत फैसले से भाजपा नेताओं की बोलती बंद : नरेश
मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने कहा कि सीपीएस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। यह निर्णय प्रदेश के लिए राहत की बात है। यह निर्णय मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश के लोगों की भी जीत है। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में प्रेस वार्ता में चौहान ने कहा कि भाजपा के कुछ नेता पैरा-50 का हवाला देते हुए प्रदेश के चुने हुए विधायकों को अयोग्य करार देने को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन उन्हें इन आदेशों के बाद मुंह की खानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से इन भाजपा नेताओं की बोलती बंद हो गई है। कहा कि हमारी सरकार ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि हम सीपीएस की आगामी नियुक्तियां नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला भी सामने आया कि मणिपुर के मामले में जो फैसला हुआ था, उसमें भी सीपीएस मामले में विधायकों को अयोग्य घोषित नहीं किया गया था और उसी पैटर्न पर हिमाचल के मामले को भी सुरक्षित रखा है। प्रदेश सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है और उसे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ नेता प्रदेश की चुनी हुई सरकार को निरंतर अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनके इरादे कभी पूरे नहीं होंगे।
राजस्व एवं उद्यान मंत्री जगत सिंह नेगी ने सीपीएस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस मामले में भाजपा प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही थी, भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा था। अब बीजेपी के मुंह पर तमाचा लगा है। बीजेपी प्रचार कर रही थी कि इन 6 विधायकों की विधानसभा सदस्यता भी जाएगी। बीजेपी ऑपरेशन लोटस की तैयारी में थी। फिर से सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही थी। जबकि बीजेपी के लोग भी सीपीएस रहे हैं। पर्यटन निगम के 18 होटलों को लेकर नेगी बोले कि आज भी हमारा मानना है कि किस पीएसयू को चलाना है और किसे बंद करना है, यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के नए आदेशों का अध्ययन कर सरकार आगामी कदम उठाएगी।