हिमाचल में मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ी, लाखों मजदूरों के लिए राहत
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हिमाचल में मनरेगा की दिहाड़ी 20 रुपये बढ़ा दी गई है। पहले मनरेगा मजदूरों को 185 रुपये दिहाड़ी मिलती थी, जो अब 205 रुपये हो गई है। प्रदेश में मनरेगा के करीब 10 लाख सक्रिय मजदू्र है, जबकि करीब 13 लाख जॉब कार्ड में 24 लाख मजदूरों ने खुद को पंजीकृत कर रखा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को डीसी, एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद यह सूचना जारी की है। प्रदेश में पिछले साल मनरेगा की दिहाड़ी 185 रुपये थी। केंद्र सरकार ने इसे 13 रुपये बढ़ाने का निर्णय किया था। ऐसे में यह बढ़कर 198 रुपये होनी थी। मंगलवार को सीएम जयराम ठाकुर ने बयान जारी किया कि एक अप्रैल से यह दिहाड़ी 20 रुपये बढ़ाई गई है। प्रदेश सरकार ने संभवतया सात रुपये अपना शेयर डाला है।
वहीं, कर्फ्यू और लॉकडाउन के दौरान इन्हें काम करने के लिए कर्फ्यू पास बनाने की जरूरत नहीं होगी। कार्य के दौरान इन्हें सरकारी के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इस फैसले से लाखों मजदूरों को पास बनाने की झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। प्रदेश भर में सरकार ने कर्फ्यू लागू कर रखा है और सरकार ने मनरेगा के कामों को आरंभ कर दिया है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के काम कराने के लिए मनरेगा के कामगारों को कर्फ्यू पास नहीं बनाने होंगे।केंद्र सरकार ने मनरेगा के कामगारों के कर्फ्यू पास नहीं बनाने की छूट दे रखी है।
यानी मनरेगा कामगारों को काम में जाने के लिए पहले जिला प्रशासन से पास बनाने अनिवार्य नहीं है। राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव डॉ. आरएन बत्ता ने पुष्टि करते हुए बताया कि मनरेगा मजदूरों को अपनी पंचायतों के क्षेत्र में काम करने के लिए कर्फ्यू पास नहीं बनाने होंगे। इतना जरूर है कि मनरेगा के कामों को करते समय केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। पंचायत प्रधानों को इन दिशा निर्देशों को पालन कराने का दायित्व सौंपा गया है।