ऐतिहासिक फैसला: दो किसानों के नाम होगी जन शताब्दी एक्सप्रेस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश ऊना जिला की अदालत ने मुआवजा न मिलने के एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आदेशों में अदालत ने दिल्ली से ऊना के लिए चलने वाली जन शताब्दी एक्सप्रेस को रोककर उसे दो प्रभावित किसान परिवारों के हवाले करने को कहा है।
इसका मतलब यह कि 16 अप्रैल तक प्रभावित किसानों को उनका मुआवजा नहीं मिला तो रेलवे स्टेशन पर जन शताब्दी एक्सप्रेस को रोकर किसानों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
शायद ही इससे पहले देश की किसी अदालत ने किसी मामले की सुनवाई करते हुए किसी ट्रेन को पीड़ितों के नाम करने का आदेश पारित किया है।
उतरी रेलवे को लगाई फटकार
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश बंसल की अदालत में हुई सुनवाई में न केवल उत्तरी रेलवे के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर फटकार लगाई गई बल्कि अदालत ने रेलवे स्टेशन पर अपने कर्मी भेजकर ट्रेन को रोकने के आदेश भी दिए।
खास यह है कि रेलवे की ओर से दी गई दलील-अपील खारिज हो गई है। अगर समय रहते रेलवे ने अधिगृहित जमीन के बदले प्रभावितों को मुआवजा न दिया तो आगामी 16 अप्रैल को अदालत के आदेश पर ट्रेन रोक ली जाएगी।
प्रभावित किसान मेला राम और मदन लाल की ओर से मामले की पैरवी कर रहे काउंसिल अरुण कुमार सैणी ने बताया कि अदालत को सौंपी गई उत्तरी रेलवे की संपत्तियों में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश बंसल की अदालत ने जन शताब्दी एक्सप्रेस को अटैच कर प्रभावितों के हवाले करने के आदेश दिए हैं।
जमीन अधिग्रहण पर देना था 35 लाख्ा का मुआवजा
उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों की जमीन ऊना-अंब ट्रैक के लिए 1998 में अधिगृहित की गई थी। इसमें स्थानीय किसान मेला राम का 8 लाख 91 हजार 424 जबकि मदन लाल का 26 लाख 53 हजार 814 रुपये मुआवजा बनता था।
लेकिन कई साल कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद उतरी रेलवे ने किसानों को मुआवजा देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। मामले की सुनवाई करते हुए 16-12-2011 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने रेलवे को प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि देने के आदेश दिए।
मगर रेलवे ने इन आदेशों को वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में चुनौती दी। यहां उतर रेलवे की याचिका पर उच्च न्यायालय ने छह महीने के लिए ऑर्डर पर स्टे किए। इस समय अवधि में रेलवे को मुआवजा राशि प्रभावित किसानों को देने को कहा गया। मगर बावजूद इसके एक फिर रेलवे बेपरवाह रहा।
इसके बाद प्रभावितों की ओर से दोबारा एडिशनल सेशन कोर्ट में एक्जीक्यूशन के लिए केस दायर किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए 9 अप्रैल 2015 को कोर्ट ने जन शताब्दी ट्रेन को अटैच करने के आदेश जारी किए हैं।