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Shimla News: सौ साल से अधिक पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारत के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ
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100 साल से अधिक पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारत के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ
28 साल से किराया न चुकाने वाले किरायेदार को बेदखली का आदेश
69 हजार रुपये से अधिक का बकाया भी चुकाना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के बैम्लोई स्थित 100 साल से भी अधिक पुरानी जर्जर रिहायशी इमारत से किरायेदार को बेदखल करने का आदेश अदालत ने जारी किया। रेंट कंट्रोलर संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने लाला मंगत राम कुठियाला चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार करते हुए किरायेदार किरलू राम को परिसर खाली करने और 69,604 रुपये का बकाया किराया 12 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता लाला मंगत राम कुठियाला चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि ब्रायनस्टन एस्टेट (ब्रायनस्टन एनेक्सी), बैम्लोई में स्थित एक कमरा और किचन-कम-बाथरूम का परिसर वर्ष 1975-76 में 125 रुपये प्रतिमाह के किराये पर दिया गया।
किरायेदार ने 1 जनवरी 1998 के बाद से कोई किराया नहीं दिया। इसके अलावा, यह भवन 100 वर्ष से अधिक पुराना होने के कारण बेहद जर्जर और असुरक्षित हो गया है। ट्रस्ट को इस इमारत का पुनर्निर्माण कराना है जो बिना परिसर खाली कराए संभव नहीं था।
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मामले की सुनवाई के दौरान किरायेदार किरलू राम अदालत में पेश नहीं हुआ जिसके चलते अदालत ने 30 मार्च 2026 को उसके खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई अमल में लाई।
याचिकाकर्ता ट्रस्ट की ओर से सचिव और तकनीकी विशेषज्ञ के तौर पर सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता बीसी शर्मा के बयान दर्ज करवाए गए। तकनीकी रिपोर्ट और तस्वीरों के आधार पर यह साबित हुआ कि भवन की स्थिति बेहद खस्ताहाल है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किरायेदार पर वैधानिक वृद्धि और ब्याज जोड़कर कुल 69,604 रुपये का बकाया बनता है। अदालत ने आदेश दिया कि किरायेदार को परिसर खाली करना होगा और बकाया राशि 12 फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज के साथ चुकानी होगी।
हालांकि, अदालत ने यह भी व्यवस्था दी कि यदि तय वैधानिक अवधि के भीतर किराये की पूरी बकाया राशि ब्याज सहित अदा कर दी जाती है तो गैर-अदायगी के आधार पर बेदखली का आधार समाप्त माना जाएगा, लेकिन भवन के असुरक्षित होने व पुनर्निर्माण की अनिवार्यता के आधार पर बेदखली लागू रहेगी।
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28 साल से किराया न चुकाने वाले किरायेदार को बेदखली का आदेश
69 हजार रुपये से अधिक का बकाया भी चुकाना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के बैम्लोई स्थित 100 साल से भी अधिक पुरानी जर्जर रिहायशी इमारत से किरायेदार को बेदखल करने का आदेश अदालत ने जारी किया। रेंट कंट्रोलर संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने लाला मंगत राम कुठियाला चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार करते हुए किरायेदार किरलू राम को परिसर खाली करने और 69,604 रुपये का बकाया किराया 12 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता लाला मंगत राम कुठियाला चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि ब्रायनस्टन एस्टेट (ब्रायनस्टन एनेक्सी), बैम्लोई में स्थित एक कमरा और किचन-कम-बाथरूम का परिसर वर्ष 1975-76 में 125 रुपये प्रतिमाह के किराये पर दिया गया।
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किरायेदार ने 1 जनवरी 1998 के बाद से कोई किराया नहीं दिया। इसके अलावा, यह भवन 100 वर्ष से अधिक पुराना होने के कारण बेहद जर्जर और असुरक्षित हो गया है। ट्रस्ट को इस इमारत का पुनर्निर्माण कराना है जो बिना परिसर खाली कराए संभव नहीं था।
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मामले की सुनवाई के दौरान किरायेदार किरलू राम अदालत में पेश नहीं हुआ जिसके चलते अदालत ने 30 मार्च 2026 को उसके खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई अमल में लाई।
याचिकाकर्ता ट्रस्ट की ओर से सचिव और तकनीकी विशेषज्ञ के तौर पर सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता बीसी शर्मा के बयान दर्ज करवाए गए। तकनीकी रिपोर्ट और तस्वीरों के आधार पर यह साबित हुआ कि भवन की स्थिति बेहद खस्ताहाल है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किरायेदार पर वैधानिक वृद्धि और ब्याज जोड़कर कुल 69,604 रुपये का बकाया बनता है। अदालत ने आदेश दिया कि किरायेदार को परिसर खाली करना होगा और बकाया राशि 12 फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज के साथ चुकानी होगी।
हालांकि, अदालत ने यह भी व्यवस्था दी कि यदि तय वैधानिक अवधि के भीतर किराये की पूरी बकाया राशि ब्याज सहित अदा कर दी जाती है तो गैर-अदायगी के आधार पर बेदखली का आधार समाप्त माना जाएगा, लेकिन भवन के असुरक्षित होने व पुनर्निर्माण की अनिवार्यता के आधार पर बेदखली लागू रहेगी।