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Shimla News: चेक बाउंस मामले में जमीन खरीदार दोषी करार, देना होगा एक लाख मुआवजा

Sat, 12 Sep 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:55 PM IST
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नोटिस मिलने के बाद देरी से भुगतान करना आपराधिक दायित्व से मुक्ति नहीं दिलाता
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दोषी ने जमीन खरीदने पर दिया था 19 लाख का चेक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चेक बाउंस होने के मामले में अतिरिक्त मुख्य मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट नंबर-1 प्रतिभा नेगी की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी पर 1,00,000 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है जिसे बतौर मुआवजा शिकायतकर्ता को अदा किया जाएगा। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को दो माह के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। टुटू निवासी अजय ठाकुर ने अपने पिता दीप राम के अधिकृत जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) धारक के तौर पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी बृज लाल (निवासी लोअर टुटू) ने दिसंबर 2016 में मौजा मजेठ में 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी थी। जमीन की रजिस्ट्री के समय आरोपी ने बाकी बची 19 लाख रुपये की राशि के भुगतान के लिए एक चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ने यह चेक अपने बैंक में लगाया तो आरोपी के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण 16 फरवरी 2017 को बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद तय समय सीमा में पूरी रकम न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने अदालत में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि उसने मुकदमे के दौरान पूरी राशि चुका दी थी जिसमें 4,00,000 रुपये नकद और 15,00,000 रुपये आरटीजीएस के माध्यम से दिए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि हालांकि आरोपी ने बाद में पूरी रकम चुका दी थी, लेकिन यह भुगतान चेक बाउंस होने और कानूनी नोटिस की अवधि बीत जाने के कई महीने बाद किया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लीगल नोटिस मिलने के बाद या मुकदमे के दौरान देरी से भुगतान करना एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत बनने वाले आपराधिक दायित्व को खत्म नहीं करता। हालांकि, देरी से ही सही लेकिन पूरी रकम चुका दिए जाने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सजा के मामले में नरमी बरती और दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया है।
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