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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को 10 महीने की कैद, चार लाख जुर्माना
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जुर्माना न भरने पर काटनी होगी तीन महीने की अतिरिक्त जेल
दो लाख रुपये का लिया था कर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट नंबर-1) शिमला, प्रतिभा नेगी की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर चेक राशि से दोगुनी रकम यानी 4,00,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की रकम वसूल होने के बाद अपील अवधि समाप्त होने पर इसे शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दिया जाए।
मामले के अनुसार, राम बाजार शिमला निवासी रमेश कुमार शर्मा ने अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, सोलन निवासी राजेंद्र सिंह दत्ता के साथ उनके दोस्ताना संबंध थे। मार्च 2018 में राजेंद्र सिंह ने आर्थिक तंगी और कारोबारी जरूरत का हवाला देकर उनसे दो लाख रुपये उधार लिए थे। जब रकम वापस नहीं की गई तो दोषी ने अपनी देनदारी चुकाने के लिए दो लाख रुपये का चेक जारी किया। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक भुगतान के लिए अपने बैंक में प्रस्तुत किया तो बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर रकम की मांग की, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान न मिलने पर अदालत में परिवाद दायर किया गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान दोषी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार किया और इसे सिक्योरिटी चेक बताया। हालांकि अदालत ने मौजूद साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता अपना मामला साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है जबकि दोषी अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। इस पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा का फैसला सुनाया।
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दो लाख रुपये का लिया था कर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट नंबर-1) शिमला, प्रतिभा नेगी की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर चेक राशि से दोगुनी रकम यानी 4,00,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की रकम वसूल होने के बाद अपील अवधि समाप्त होने पर इसे शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दिया जाए।
मामले के अनुसार, राम बाजार शिमला निवासी रमेश कुमार शर्मा ने अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, सोलन निवासी राजेंद्र सिंह दत्ता के साथ उनके दोस्ताना संबंध थे। मार्च 2018 में राजेंद्र सिंह ने आर्थिक तंगी और कारोबारी जरूरत का हवाला देकर उनसे दो लाख रुपये उधार लिए थे। जब रकम वापस नहीं की गई तो दोषी ने अपनी देनदारी चुकाने के लिए दो लाख रुपये का चेक जारी किया। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक भुगतान के लिए अपने बैंक में प्रस्तुत किया तो बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर रकम की मांग की, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान न मिलने पर अदालत में परिवाद दायर किया गया।
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अदालत में सुनवाई के दौरान दोषी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार किया और इसे सिक्योरिटी चेक बताया। हालांकि अदालत ने मौजूद साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता अपना मामला साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है जबकि दोषी अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। इस पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा का फैसला सुनाया।
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