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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह महीने की कैद और दो लाख जुर्माना
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2014 में दोषी ने लिया था एक लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की अदालत ने एक लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त मुख्य मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1 शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने दोषी को छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर चेक राशि का दोगुना यानी 2,00,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि शिकायतकर्ता को बतौर मुआवजा दी जाएगी।
मामले के अनुसार शिमला निवासी शिकायतकर्ता नंद किशोर उर्फ नंद लाल शर्मा ने सोलन निवासी आरोपी जितेंद्र सिंह के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक दोषी ने 30 जनवरी 2014 को उनसे 1,00,000 रुपये का नकद ऋण लिया था। इस देनदारी को चुकाने के लिए जितेंद्र सिंह ने 10 अगस्त 2015 को एक लाख रुपये का चेक जारी किया।
शिकायतकर्ता ने जब यह चेक अपने बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर राशि की मांग की लेकिन निर्धारित समय में भुगतान न होने पर अदालत में शिकायत दायर की गई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसने केवल 50,000 रुपये लिए थे जो चुका दिए गए हैं और चेक केवल सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, दोषी अपने इस दावे के समर्थन में अदालत में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका जबकि चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात उसने स्वीकार की। दोनों पक्षों की दलीलें और मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की अदालत ने एक लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त मुख्य मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1 शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने दोषी को छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर चेक राशि का दोगुना यानी 2,00,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि शिकायतकर्ता को बतौर मुआवजा दी जाएगी।
मामले के अनुसार शिमला निवासी शिकायतकर्ता नंद किशोर उर्फ नंद लाल शर्मा ने सोलन निवासी आरोपी जितेंद्र सिंह के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक दोषी ने 30 जनवरी 2014 को उनसे 1,00,000 रुपये का नकद ऋण लिया था। इस देनदारी को चुकाने के लिए जितेंद्र सिंह ने 10 अगस्त 2015 को एक लाख रुपये का चेक जारी किया।
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शिकायतकर्ता ने जब यह चेक अपने बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर राशि की मांग की लेकिन निर्धारित समय में भुगतान न होने पर अदालत में शिकायत दायर की गई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसने केवल 50,000 रुपये लिए थे जो चुका दिए गए हैं और चेक केवल सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, दोषी अपने इस दावे के समर्थन में अदालत में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका जबकि चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात उसने स्वीकार की। दोनों पक्षों की दलीलें और मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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