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Shimla News: बाल यौन शोषण मामले में आरोपी कोर्ट से बरी
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कोर्ट ने पुलिस जांच पर की गंभीर टिप्पणी
वीडियो की फोरेंसिक जांच भी नहीं करवाई गई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने बाल यौन शोषण मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने बाल यौन शोषण मामले की सुनवाई में कहा कि अभियोजन पक्ष को यह ध्यान रखना चाहिए कि अदालत के समक्ष कोई कथित अश्लील वीडियो क्लिप पेश नहीं की है।
आरोपी के मोबाइल फोन खोने के दावे को गलत साबित करने के लिए रिकॉर्ड में भी कुछ नहीं है। यह नहीं कहा जा सकता है कि अविनाश के मोबाइल से सौरभ के मोबाइल पर कोई बाल पोर्न वीडियो साझा किया था। प्रासंगिक रूप से सौरभ के मोबाइल फोन को यह साबित करने के लिए फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा कि अविनाश की इंस्टाग्राम आईडी से उसे जो वीडियो क्लिप मिली थी, वह एक बाल पोर्न वीडियो थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा ने फैसला की सुनवाई में उपमंडल रोहड़ू के टिक्कर निवासी अविनाश के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया। यह मामला 24 मई 2023 में रोहड़ू थाना क्षेत्र का है। दरअसल एनसीआरसी दिल्ली की ओर से पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम शिमला के साथ साइबर टिपलाइन रिपोर्ट साझा की थी। इसमें बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री दिखाने वाला एक वीडियो क्लिप वायरल हुआ था। बाद में एनसीआरसी ने वीडियो क्लिप शिमला पुलिस के आधिकारिक पोर्टल हेल्प लाइन पर भेजी। एसपी शिमला के संज्ञान में मामला आने पर एसएचओ रोहड़ू को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी आधार पर आरोपी अविनाश को गिरफ्तार किया था। अदालत में अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 5 गवाहों की जांच की। लेकिन फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पोक्सो/दुष्कर्म) ने ठोस सबूतों के अभाव से अविनाश को दंडनीय अपराधों के लिए दोषमुक्त कर दिया। संवाद
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पोर्न वीडियो क्लिप भेजने के लगे थे आरोप
जांच के मुताबिक वर्ष 2021 में अविनाश ने अपने मोबाइल फोन पर एक इंस्टाग्राम आईडी बनाई थी। 23 जुलाई, 2022 को उक्त आईडी से अपने दोस्त सौरव मेहता की इंस्टाग्राम आईडी पर एक चाइल्ड पोर्न वीडियो क्लिप भेजी थी। पूछताछ में सौरव ने बताया कि वह नेटवर्क दिक्कत के कारण इंस्टाग्राम आईडी से प्राप्त वीडियो क्लिप को डाउनलोड और देख नहीं सका। जांच के दौरान अविनाश अपना मोबाइल फोन पेश नहीं कर सका, ऐसे में आईपीसी की धारा 201 जोड़ी गई।
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वीडियो की फोरेंसिक जांच भी नहीं करवाई गई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने बाल यौन शोषण मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने बाल यौन शोषण मामले की सुनवाई में कहा कि अभियोजन पक्ष को यह ध्यान रखना चाहिए कि अदालत के समक्ष कोई कथित अश्लील वीडियो क्लिप पेश नहीं की है।
आरोपी के मोबाइल फोन खोने के दावे को गलत साबित करने के लिए रिकॉर्ड में भी कुछ नहीं है। यह नहीं कहा जा सकता है कि अविनाश के मोबाइल से सौरभ के मोबाइल पर कोई बाल पोर्न वीडियो साझा किया था। प्रासंगिक रूप से सौरभ के मोबाइल फोन को यह साबित करने के लिए फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा कि अविनाश की इंस्टाग्राम आईडी से उसे जो वीडियो क्लिप मिली थी, वह एक बाल पोर्न वीडियो थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा ने फैसला की सुनवाई में उपमंडल रोहड़ू के टिक्कर निवासी अविनाश के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया। यह मामला 24 मई 2023 में रोहड़ू थाना क्षेत्र का है। दरअसल एनसीआरसी दिल्ली की ओर से पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम शिमला के साथ साइबर टिपलाइन रिपोर्ट साझा की थी। इसमें बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री दिखाने वाला एक वीडियो क्लिप वायरल हुआ था। बाद में एनसीआरसी ने वीडियो क्लिप शिमला पुलिस के आधिकारिक पोर्टल हेल्प लाइन पर भेजी। एसपी शिमला के संज्ञान में मामला आने पर एसएचओ रोहड़ू को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी आधार पर आरोपी अविनाश को गिरफ्तार किया था। अदालत में अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 5 गवाहों की जांच की। लेकिन फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पोक्सो/दुष्कर्म) ने ठोस सबूतों के अभाव से अविनाश को दंडनीय अपराधों के लिए दोषमुक्त कर दिया। संवाद
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पोर्न वीडियो क्लिप भेजने के लगे थे आरोप
जांच के मुताबिक वर्ष 2021 में अविनाश ने अपने मोबाइल फोन पर एक इंस्टाग्राम आईडी बनाई थी। 23 जुलाई, 2022 को उक्त आईडी से अपने दोस्त सौरव मेहता की इंस्टाग्राम आईडी पर एक चाइल्ड पोर्न वीडियो क्लिप भेजी थी। पूछताछ में सौरव ने बताया कि वह नेटवर्क दिक्कत के कारण इंस्टाग्राम आईडी से प्राप्त वीडियो क्लिप को डाउनलोड और देख नहीं सका। जांच के दौरान अविनाश अपना मोबाइल फोन पेश नहीं कर सका, ऐसे में आईपीसी की धारा 201 जोड़ी गई।
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