सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहे ये मां-बाप, पीएम मोदी से लगाएंगे गुहार
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हिमाचल के मंडी जोनल अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत के बाद परिजनों का कहना है कि उन्होंने बेटी खोई है, हिम्मत नहीं। वे अस्पताल प्रबंधन की बदइंतजामी की प्रधानमंत्री से शिकायत करेंगे। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लिटाया गया। उनके लिए बिस्तरों तक की व्यवस्था नहीं की गई।
मां दिशा और पिता विपन का कहना है कि हमारी बेटी तो दुनिया से चली गई, लेकिन किसी और के साथ ऐसा न हो, इसलिए हम अस्पताल प्रबंधन की पीएम से शिकायत करेंगे।
मां ने बताया कि बुधवार रात जब गुड़िया बिलख-बिलख कर रो रही थी तो दो बार नर्सों को बताया गया, लेकिन उन्होंने अनसुना किया और न डाक्टर को बुलाया और न खुद ध्यान दिया।
जब एक औरत दूसरी औरत के दर्द को न समझ सके तो बड़े साहबों से क्या उम्मीद। डॉक्टर अब बयान दे रहे हैं कि निमोनिया-पीलिया से बच्ची की मौत हुई। लेकिन, जब मैंने रिपोर्ट दिखाई तो सब नार्मल बताया।
अस्पताल की लापरवाही से हुई बच्ची की मौत
मां दिशा ने दावा किया है कि डिलीवरी से ठीक पहले टेस्ट करवाए तो उसमें मुझे पीलिया था। लेकिन, जब डाक्टर को रिपोर्ट दिखाई तो डाक्टर ने मना कर दिया। जब बेटी की मौत हो गई तो डाक्टर अब बयान दे रहे हैं कि बच्ची की निमोनिया और पीलिया से मौत हुई है।
मेरी बच्ची की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन जिम्मेवार है। उधर, जोनल अस्पताल मंडी के एमएस टीसी महंत ने कहा कि मृतक बच्ची की मां को पीलिया नहीं था।
बुधवार को रात ढाई बजे के करीब डिलीवरी हुई थी। इसके बाद अगली सुबह ही उन्हें रिलीव कर दिया गया है। यदि उसको पीलिया होता तो हम बच्ची को मशीन (इंबीक्यूटर) में रखते।
जागा स्वास्थ्य महकमा, वीडियो कांफ्रेंसिंग से आदेश
हिमाचल के अस्पतालों में जरूरत पड़ने पर निजी स्त्री रोग विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी। मंडी की घटना के बाद राज्य सरकार का स्वास्थ्य महकमा एकाएक जाग गया है। प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने अधीनस्थ अधिकारियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से ये आदेश जारी किए हैं कि कुल्लू, सुंदरनगर और जोगिंद्रनगर अस्पतालों में हररोज प्रसव मामलों का ब्योरा निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को भेजा जाए।
ये भी सुनिश्चित करने को कहा कि वहां से सामान्य प्रसूति के किसी भी मामले को अन्य अस्पतालों को हस्तांतरित नहीं किया जाए। उन्होंने ये भी निर्देश दिए हैं कि यदि आवश्यक हो तो उस स्थिति में निजी स्त्री विशेषज्ञ की सेवाएं भी ली जांए। इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आए।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने शनिवार को राज्य सचिवालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधीश मंडी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी, कुल्लू और राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय नेरचौक मंडी के प्रधानाचार्य से चर्चा कर इनके यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने कुल्लू और सुंदरनगर के अस्पतालों में आयुर्विज्ञान महाविद्यालय नेरचौक से एक एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को रोटेशन के आधार पर तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडी अस्पताल में मरीजों को बिस्तर उपलब्ध करवाने का इस तरह का प्रावधान किया जाए कि किसी भी अन्य वार्ड में जहां बिस्तर खाली हों, उसे अन्य वार्ड के मरीजों को भी प्रदान किया जाए। साथ ही मरीजों को ठंड से बचाव के लिए उचित प्रबंध किए जाएं।
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया मामला
मंडी के बैहना के अनिल कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी पिछले दो दिनों से दाखिल थीं, लेकिन बेड न मिलने के कारण उन्हें ठंड में ही गायनी वार्ड के बाहर जमीन पर बिस्तर लगाना पड़ा। इससे उन्हें काफी परेशानी आई।
अब जब प्रशासन पर सवाल उठे तो उन्हें बेड की सुविधा मिल गई है। इसके लिए अमर उजाला के तहे दिल से आभारी हैं।
वहीं रामनगर की गरजो देवी, कोटली के सुकाकून गांव की कमला देवी, सलापड़ की ममता देवी, टिहरी के शिव कुमार ने कहा कि अमर उजाला की ओर से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने पर ही समस्या का हल हुआ है। अब उन्हें बेड की सुविधा मिल गई है।