विकास का सच: कागजों में ही बनाया रास्ता, एक लाख के बिल भी पास
हिमाचल में रास्ते के निर्माण में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। विकास खंड सलूणी की ग्राम पंचायत बाड़का के गांव लांघा के लिए खडूंजा पाथ का निर्माण कागजों में तो हो गया, लेकिन धरातल में नजर नहीं आ रहा।
खुद को ठगा सा महसूस कर रहे ग्रामीण एक लाख रुपये से रास्ता तैयार करने के विभागीय दावे से हैरत में हैं। टिकरी की तरफ खडूंजा पाथ का कहीं वजूद नहीं है। वर्ष 2017 में इस कार्य को छह महीने में पूरा करने का दावा किया गया है।
इस पर बाकायदा एक लाख रुपये खर्च किए गए हैं। ग्रामीणों के सवाल उठाने पर विभागीय अधिकारी और जिला प्रशासन मामले की जांच करवाने की बात कह रहा है। सूत्रों की मानें तो लांघा से टिकरी के लिए बने खडूंजा पाथ निर्माण के बिल भी जारी हो चुके हैं।
मनरेगा योजना के तहत विकास खंड सलूणी की विभिन्न पंचायतों में विकास कार्य करवाए गए हैं। वर्ष 2017 में बाड़का पंचायत के गांव लांघा से टिकरी के लिए करीब दो किलोमीटर तक खडूंजा पाथ के निर्माण को एक लाख रुपय स्वीकृत हुए।
कागजों में कार्य एक अप्रैल 2017 को शुरू हुआ
लांघा गांव के ग्रामीणों कमल शर्मा, मनासा शर्मा ने बताया कि खडूंजा पाथ का निर्माण कागजों में ही हुआ है। इसके लिए बाकायदा पैसा स्वीकृत हुआ था। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही ही है कि किसी ने भी इसका निरीक्षण करना उचित नहीं समझा। पंचायत प्रधान बाड़का अंग्रेजो देवी ने कहा कि लांघा से टिकरी के लिए खडूंजा मार्ग का निर्माण करवा दिया गया है।
खडूंजा पाथ से इन गांवों को मिलना था लाभ
लांघा से टिकरी के लिए खडूंजा पाथ से गांव लांघा, पुखरी, घरोड़ी सहित अन्य गांवों के लोगों को लाभ मिलना था। इस रास्ते से ही गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। बच्चे भी इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं।
ये बोले अधिकारी
बीडीओ सलूणी योगेंद्र कुमार ने कहा कि मामले की तफ्तीश की जाएगी। यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डीआरडीए के परियोजना अधिकारी संजीव ठाकुर ने भी मामले की छानबीन की बात कही। डीसी चंबा हरिकेश मीणा ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत गांवों में विकासात्मक कार्य करवाए जाते हैं। यदि उक्त खडूंजा पाथ का निर्माण वास्तविकता में नहीं हुआ है तो इसकी तफ्तीश संबंधित विभागीय अधिकारियों से करवाई जाएगी।