फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   corona warriors: Teachers are looking after the future of children by going door-to-door in Lahaul

संकट के सिपाही: लाहौल में घर-घर जाकर विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे शिक्षक

Sun, 06 Jun 2021 02:35 AM IST
Krishan Singh अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति) Published by: Krishan Singh Updated Sun, 06 Jun 2021 02:35 AM IST
सार

लाहौल के दुर्गम गांव सलग्रां में इंटरनेट तो दूर की बात दूरसंचार सेवा भी उपलब्ध नहीं है। सलग्रां स्कूल में तैनात हिंदी के प्रवक्ता पालम सिंह सलग्रां आने से पहले तिंदी स्कूल में बतौर टीजीटी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पालम सिंह कोविड महामारी के इस संकटकाल में बच्चों को हर सप्ताह घर पहुंच कर असाइनमेंट और नोट्स पहुंचाते हैं। 

विज्ञापन
corona warriors: Teachers are looking after the future of children by going door-to-door in Lahaul
घर-घर जाकर विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे शिक्षक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संकट के इस मुश्किल दौर में इंटरनेट की सुविधा न होने पर भी लाहौल घाटी में गुरुजन ऑफलाइन घर-घर जाकर शिक्षा की रोशनी फैला रहे हैं। घाटी के दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा न के बराबर है। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है। स्कूल बंद हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसे देखते हुए कुछ अध्यापक दुर्गम क्षेत्रों में घर-घर जाकर बच्चों की पढ़ाई में मदद कर रहे हैं। 

विज्ञापन


लाहौल के दुर्गम गांव सलग्रां में इंटरनेट तो दूर की बात दूरसंचार सेवा भी उपलब्ध नहीं है। सलग्रां स्कूल में तैनात हिंदी के प्रवक्ता पालम सिंह सलग्रां आने से पहले तिंदी स्कूल में बतौर टीजीटी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पालम सिंह कोविड महामारी के इस संकटकाल में बच्चों को हर सप्ताह घर पहुंच कर असाइनमेंट और नोट्स पहुंचाते हैं। फिर दूसरे सप्ताह इन असाइनमेंट की कॉपी को बच्चों से लेकर मूल्यांकन करते हैं।
विज्ञापन


बीते साल भी चंबा बॉर्डर से सटे तिंदी स्कूल में 79 विद्यार्थियों को पालम सिंह ने घर-घर पहुंच कर तालीम दी।  पालम सिंह कहते हैं कि कार्य दिवस के अलावा विद्यार्थियों की सुविधा के मुताबिक अवकाश वाले दिन भी घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, ताकि कोई बच्चा पीछे न छूट जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


लाहौल के अंतिम छोर में बसे तिंदी पंचायत के कैण प्राथमिक स्कूल में तैनात जेबीटी अध्यापक राजेंद्र बीते डेढ़ सालों से बिना अवकाश लिए बच्चों को ऑफलाइन सिस्टम के जरिये शिक्षा मुहैया करवा रहे हैं। राजेंद्र पढ़ाई के अलावा बच्चों को संगीत की तालीम भी देते हैं। राजेंद्र ने बताया कि वह पिछले साल ही नियमित हुए हैं। वहीं, मयाड़ घाटी के तिंगरेट में तैनात केंद्रीय मुख्य अध्यापक शाम लाल भी नौनिहालों के साथ शिक्षकों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।


वह अपने घर फूडा से करीब 60 किमी दूर तिंगरेट में बतौर सीएचटी तैनात हैं। शाम लाल पिछले कई महीनों से अवकाश पर घर इसलिए नहीं गए हैं, ताकि बच्चों को रविवार के दिन भी पढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के उपनिदेशक चिरंजीलाल कहते हैं कि ऐसे अध्यापकों के कारण लाहौल जैसे दुर्गम इलाकों में इंटरनेट के बिना भी बच्चों को घर-द्वार पर बेहतर शिक्षा मिल रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed