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संकट के सिपाही : मुसीबत पर भारी सामाजिक जिम्मेदारी, समझ के साथ सेवा का भाव
Mon, 10 May 2021 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 10 May 2021 05:56 AM IST
सार
- कोरोना काल में लोग अलग-अलग तरीके से फर्ज निभाकर अपने दायित्वबोध का परिचय दे रहे हैं
- चिकित्सक बिरादरी के अलावा और भी लोग हैं जो संकट के इस दौर में सिपाही जैसी भूमिका अदा कर रहे हैं
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शादी के वक्त निर्मल और डॉ. रमेश कुमार तथा इरशाद बेग
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कोरोना काल में लोग अलग-अलग तरीके से फर्ज निभाकर अपने दायित्वबोध का परिचय दे रहे हैं। चिकित्सक बिरादरी के अलावा और भी लोग हैं जो इस संकट के दौर में सिपाही जैसी भूमिका अदा कर रहे हैं। आज भी कुछ ऐसे ही कोरोना योद्धाओं की बात...
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बिना बराती खुद ही कार चलाकर दुल्हन को ले आए निर्मल (हमीरपुर, हिमाचल)
कोरोना काल में सरकार की ओर से 20 लोगों की शर्त के बावजूद कई जगह इस शर्त के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन हमीरपुर का युवक बिन बराती खुद कार चलाकर दुल्हन के घर पहुंच गया। कोविड महामारी के चलते सारे रीति-रिवाजों को दरकिनार कर दूल्हे ने समाज में एक मिसाल पेश की है। सभी लोग युवक की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।
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जिला हमीरपुर के भोरंज उपमंडल के धमरोल गांव निवासी निर्मल शर्मा ने बरातियों और अपने घर के किसी भी व्यक्ति के बिना इस तरह की शादी कर कइयों को संदेश दिया है। निर्मल दूल्हा बनकर स्वयं 15 किलोमीटर कार चलाकर दुल्हन के घर पपलोह पहुंचे और दुल्हन को लेकर वापस घर आ गए। बड़ी बात यह रही कि पूरी शादी में दुल्हन के माता-पिता के अलावा केवल फेरे करवाने वाला पंडित ही रहा।
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अनोखी शादी के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहे हैं। दूल्हे निर्मल के घर पर कोविड प्रोटोकाल के अनुसार केवल शादी की तमाम रस्में अदा की गईं, लेकिन बरात में बीस लोगों की इजाजत के बावजूद भी निर्मल ने सरकार के नियमों को कायम करते हुए अकेले ही शादी में जाने का फैसला लिया। दूल्हे निर्मल शर्मा पुत्र तिलक राज शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के चलते सरकार की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि जिस तरह उन्होंने शादी में नियमों का पालन किया, वैसे ही लोग भी नियमों का पालन करें।
टीकाकरण में गड़बड़ी न हो इसलिए करते हैं 20-20 घंटे काम़ (इरशाद बेग, कन्नौज)
कोविड टीकाकरण के लिए ब्लाक पर लगने वाले सत्र व अन्य विवरण को कोविन पोर्टल पर अपडेट करना जिला वैक्सीन एवं कोल्ड चेन मैनेजर इरशाद बेग की दिनचर्या हो गई है। वह आठ माह से बिना छुट्टी लिए सेवा दे रहे हैं।
मूलरूप से फर्रुखाबाद जनपद के निवासी इरशाद बेग संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के ई-विन प्रोजेक्ट में जिला कोल्ड चेन मैनेजर हैं। नियमित टीकाकरण के लिए वैक्सीन प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वैक्सीन का वितरण, प्रबंधन, कोल्ड चेन उपकरणों के तापमान की ऑनलाइन निगरानी, टेक्निकल सपोर्ट, वैक्सीन से जुड़े विश्लेषण ड्यूटी में शामिल हैं।
इरशाद बेग बताते हैं कि तीसरे चरण में लक्ष्य बड़ा होने से टीकाकरण सत्र बढ़ा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में कोविड टीकाकरण प्रबंधन चुनौती भरा काम था। राज्य स्तरीय अफसरों के साथ रात 12 बजे तक बैठकें चलती थीं। इसके बाद टीकाकरण सत्रों के लिए लाभार्थियों का चयन, वैक्सीन प्रबंधन आदि तैयारियां करनी पड़ती थीं। एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाने के लिए 20-20 घंटे तक काम कर कर्तव्यों का निर्वहन किया। कभी हार नहीं मानी।
खुद संक्रमित हुए पर नहीं हारी हिम्मत, फिर से वार्ड में आ डटे (डॉ. रमेश कुमार, सहारनपुर)
पिछले सवा साल से कोरोना संक्रमण के खिलाफ जंग लड़ रहे पीएचसी सबदलपुर के चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश कुमार फिलहाल फतेहपुर कोविड अस्पताल में संक्रमितों का उपचार कर रहे हैं। चित्रकूट के रहने वाले डॉ. रमेश बताते हैं इस अवधि में उन्होंने कोई भी शादी, जन्मदिन पार्टी अटेंड नहीं की है। फोन पर ही संबंधित शुभकामना दे रहे हैं। रिश्तेदारी में कोई दुख की घड़ी आई तो भी फोन से ही सांत्वना दे देते हैं।
अब तक वे 14-14 दिन की ड्यूटी 15 बार वार्ड के अंदर कर चुके हैं। एक बार खुद भी संक्रमित हो गए थे। ठीक होते ही फिर से वार्ड में आ डटे। बताते हैं कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जहां संक्रमित रोगियों को ज्यादा कष्ट दे रही है, वहीं इस लड़ाई से जूझ रहे चिकित्साकर्मियों पर भी यह भारी पड़ रही है। पिछली बार की तुलना में इस बार वर्क लोड चार गुना तक हो गया है। संवाद
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