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कोरोना कर्फ्यू: हिमाचल में बिना मंजूरी भी काम कर सकेंगी पंचायतें, आदेश जारी
Thu, 06 May 2021 06:33 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 06 May 2021 06:33 PM IST
सार
मई में अगर कोरोना संकट टल जाता तो ग्राम सभाएं बुलाई जा सकती थीं, पर यह संकट बढ़ गया है। ऐसे में ग्राम सभाएं होने के कोई आसार नहीं हैं। पंचायत प्रधान और सदस्य आगे भी प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजेंगे। बाद में जब कभी ग्राम सभाएं होंगी तो इसके लिए पोस्ट फैक्टो मंजूरी ली जाएगी।
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सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में ग्राम पंचायतें बिना मंजूरी ही अब काम कर पाएंगी। ग्राम सभाओं से अब पोस्ट फैक्टो मंजूरी ली जाएगी। पंचायती राज विभाग ने इस बारे में सभी ग्राम पंचायतों को आदेश जारी किए हैं। राज्य में कोरोना संकट के बीच करीब डेढ़ साल से ग्राम सभाएं नहीं हो पा रही हैं। बीते अक्तूबर में ग्राम सभा की मंजूरी के बिना ही मनरेगा की शेल्फें और अन्य कार्यों के प्रस्ताव सरकार को भेजे गए थे। इसी तरह अप्रैल की भी शेल्फें भेजी गईं।
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मई में अगर कोरोना संकट टल जाता तो ग्राम सभाएं बुलाई जा सकती थीं, पर यह संकट बढ़ गया है। ऐसे में ग्राम सभाएं होने के कोई आसार नहीं हैं। पंचायत प्रधान और सदस्य आगे भी प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजेंगे। बाद में जब कभी ग्राम सभाएं होंगी तो इसके लिए पोस्ट फैक्टो मंजूरी ली जाएगी। पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक केवल शर्मा ने बताया कि सभी पंचायतों को पत्र भेजे गए हैं कि अभी ग्राम सभाएं नहीं होंगी। पोस्ट फैक्टो अनुमति ग्राम सभाओं से बाद में ली जाएगी। उससे पहले इस संबंध में पंचायतें खुद ही निर्णय ले सकती हैं।
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बीते अक्तूबर की मनरेगा शेल्फों को भी नहीं मिली मंजूरी
कोविड संकट में मनरेगा के काम में लेटलतीफी हो रही है। शिमला की ग्राम पंचायत सैंज के उपप्रधान प्रेम दत्त और क्यार पंचायत के उपप्रधान नरेश शर्मा ने बताया कि बीते अक्तूबर में गई मनरेगा शेल्फों को भी अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। अप्रैल में ग्राम सभाएं न होने से अभी तक शेल्फें नहीं भेजी जा सकी हैं। इस मामले को विभाग के समक्ष उठाया गया है। नई शेल्फों से पहले पुरानी शेल्फों पर भी मंजूरी आनी चाहिए।
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