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कोरोना संकट: हिमाचल सरकार को गांवों की चिंता, चुनौतियों के अंबार

Thu, 20 May 2021 11:06 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 20 May 2021 11:06 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार को गांवों की चिंता का ख्याल आया है। गांवों में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है। यहां सबसे बड़ी समस्या लोगों की कोविड टेस्टिंग की है।

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Corona crisis: Himachal govt worried about villages, many challenges ahead
कोरोना(सांकेतिक ) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

 शहरों में कोरोना संकट के बीच अब हिमाचल सरकार की सबसे बड़ी चिंता गांवों की है। ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अगर यह वायरस इन इलाकों में ज्यादा फैल गया तो इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। गांवों में स्वास्थ्य ढांचे की भी हालत खराब है। इनमें कई संस्थानों में न तो पर्याप्त डॉक्टर, नर्स या अन्य स्टाफ है और न ही ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार को गांवों की चिंता का ख्याल आया है।

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गांवों में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है। यहां सबसे बड़ी समस्या लोगों की कोविड टेस्टिंग की है। प्रदेश की वर्तमान में रोजाना की करीब 20 हजार नमूनों की टेस्टिंग की क्षमता है, जबकि हिमाचल की आबादी करीब 70 लाख है। दूसरी बड़ी चुनौती स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचसी, सीएचसी में एक तो पहले से ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। ऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों का प्रबंध करना आसान काम नहीं होगा। एक अन्य चुनौती संक्रमण से बचे गांवों को महफूज रखने की भी है। 
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तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने बनाई पीड्रियाट्रिक्स फोर्स 
तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने पीड्रियाट्रिक्स फोर्स का भी गठन किया है। इस लहर की चपेट में बच्चे भी आ सकते हैं। इसके लिए सरकार ने कमर कस ली है। ये जल्दी से इसका मूल्यांकन करेंगे कि क्या करना है। इसमेें बाल रोग विशेषज्ञ हैं।    

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200 बेडों वाले सभी अस्पतालों में होगी ऑक्सीजन की आपूर्ति : खाची

मुख्य सचिव अनिल खाची ने कहा कि  प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों, आशा वर्करों आदि के माध्यम से विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी न हो। इस बात पर विशेष ध्यान होगा।

कम से कम राज्य मेें 200 बेड वाले अस्पतालों में सबमें ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाएगी। ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाएंगे। ऑक्सीजन कंसेंटरेटर वहां लगाए जाएंगे, जहां लो ऑक्सीजन की जरूरत है। बाकी सिलिंडरों का प्रबंध तो रहेगा ही। ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता लोगों को भी इसकी आपूर्ति ठीक से हो।  

कई ब्लॉकों में शुरू किए रैपिड टेस्ट 
कई ब्लॉकों में रैपिड टेस्ट भी शुरू किए गए हैं। शिमला जिला में ये मत्याना और कोटखाई ब्लॉक में आरंभ किए गए हैं। मत्याना ब्लॉक की कमाह पंचायत में 83 लोगों के रैपिड टेस्ट किए गए। इनमें से 11 पॉजिटिव आए हैं। रैंडम सैंपलिंग के रूप में यह सिलसिला पूरे प्रदेश में चल रहा है। 

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