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11 साल तक लटकाए रखा मामला, गिरफ्तारी वारंट जारी हुए तो जमा करवाए आठ लाख

Thu, 27 Feb 2020 06:21 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, घुमारवीं (बिलासपुर)
अमर उजाला नेटवर्क, घुमारवीं (बिलासपुर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 27 Feb 2020 06:21 PM IST
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consumer court Bilaspur judgement eight lakh rupee to victim
सांकेतिक तस्वीर

प्रदेश के बिलासपुर जिले में जिला उपभोक्ता फोरम ने एक शिकायत का निपटारा करते हुए शिकायतकर्ता को 8 लाख 64 हजार रुपये जारी करने के आदेश दिए हैं। अधिवक्ता चमन लाल ने बताया कि रत्न लाल ने वर्ष 2002 में महिंद्रा एंड महिंद्रा की एजेंसी घुमारवीं से एक नया ट्रैक्टर खरीदा था। लेकिन, ट्रैक्टर खरीदने के कुछ दिन बाद रत्न लाल को पता चला कि कंपनी ने उसे पुराना ट्रैक्टर बेच दिया है।

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रत्न लाल ने इस बारे में कंपनी को बताया। लेकिन, उन्होंने रत्न लाल की बात नहीं सुनी। कंपनी ने रत्न लाल को डुप्लीकेट सेल सर्टिफिकेट जारी किया था और इसके चलते ट्रैक्टर पंजीकृत भी नहीं हो पाया। रत्न लाल ने यह ट्रैक्टर 3,15,000 रुपये में खरीदा था और कुछ राशि नकद दी थी। बैंक से फाइनेंस भी करवाया गया था। लेकिन कंपनी द्वारा धोखाधड़ी करने पर रत्न लाल को परेशानी का सामना करना पड़ा। 
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इसके बाद रत्न लाल ने 21 अप्रैल 2004 को उपभोक्ता फोरम में कंपनी के खिलाफ शिकायत दायर की। फोरम ने 28 दिसंबर 2005 को रत्न लाल की शिकायत को मंजूर करके कंपनी को ट्रैक्टर बदलने व असल सेल सर्टिफिकेट देने के आदेश दिए। लेकिन, इसके बाद कंपनी ने राज्य आयोग शिमला में अपील कर दी।

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जहां से पुन: सुनवाई के आदेश 19 जून 2007 को हुए। इसके उपरांत जिला उपभोक्ता फोरम ने फिर से 10 अप्रैल 2008 को रत्न लाल की शिकायत को स्वीकार करते हुए फिर से कंपनी को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को नया ट्रैक्टर 30 दिनों के भीतर दे व 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए।

इसके साथ ही आदेश जारी किया कि यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर नया ट्रैक्टर न दे पाए तो कंपनी रत्न लाल को 3,60000 रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे। उन्होंने बताया कि इस फैसले के बाद भी कंपनी ने न तो रत्न लाल को नया ट्रैक्टर दिया और न ही पैसा लौटाया। जब कंपनी ने फोरम के फैसले की पालना नहीं की तो रत्न लाल ने अगस्त 2008 में फैसले को लागू करने के लिए फोरम में आवेदन दायर किया।

इस आवेदन पर कंपनी ने करीब 11 साल तक समन नहीं रिसीव किए और मामला लटका रहा। फोरम ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए। इस पर कंपनी ने 3,60,000 रुपये की राशि ब्याज सहित कुल 8,64,064 रुपये जमा करवा दिए। फोरम ने यह राशि रत्न लाल के आवेदन पर उसे जारी करने के आदेश दिए हैं।

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