घर में ही शुरू हो गई थी सुक्खू की घेराबंदी, जानिए कैसे
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हिमाचल कांग्रेस को भले ही लंबे समय बाद नया कप्तान मिला है, लेकिन कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के खिलाफ संगठन में उनके घर में ही पहले से घेराबंदी शुरू हो चुकी थी। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले राजेंद्र राणा के साथ पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू का छत्तीस का आंकड़ा रहा है।
इसके साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी रहीं प्रोमिला भी सुक्खू से काफी नाराज थीं। बीते दो महीनों में जिला उपाध्यक्ष और सचिव के अलावा कई बड़े पदाधिकारी कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हमीरपुर जिला में आयोजित कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह और सुक्खू एक मंच पर बहुत ही कम दिखे। वीरभद्र सिंह हमेशा हमीरपुर में आयोजित कार्यक्रमों में सुक्खू को अध्यक्ष पद से हटाने की वकालत करते नजर आए।
वहीं, विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रोमिला भी अपने निष्कासन पर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के खिलाफ गांधी चौक में आयोजित जनसभा में भड़ास निकाल चुकी हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि सुक्खू उन्हें कांग्रेस से हटाने की हिम्मत नहीं रखते। बता दें कि भोरंज विधानसभा क्षेत्र से छह बार के भाजपा विधायक स्वर्गीय ईश्वर दास धीमान के निधन पर दो वर्ष पहले ही उपचुनाव हुए थे।
जिसमें कांग्रेस ने प्रोमिला देवी को चुनाव में बतौर प्रत्याशी उतारा था। लेकिन प्रोमिला भाजपा प्रत्याशी डॉ. अनिल धीमान से चुनाव हार गईं। इसके बाद वर्ष 2018 के आम चुनावों में कांग्रेस ने प्रोमिला की जगह सुरेश कुमार को टिकट दिया। लेकिन सुरेश कुमार भी भाजपा प्रत्याशी कमलेश कुमारी से चुनाव हार गए।
हार का ठीकरा प्रोमिला देवी पर फोड़ते हुए उन पर पार्टी विरोधी कार्य करने के आरोप लगे और अंत में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। जिसके बाद से प्रोमिला देवी भी सुखविंद्र सिंह सुक्खू से काफी नाराज चल रही थीं। अब प्रदेश कांग्रेस की कमान कुलदीप राठौर के पास आई है तो जिला कांग्रेस में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।