कांग्रेस विधायक ने लगाया उपेक्षा का आरोप, बोले- कार्ड में मेरा नाम तक नहीं
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दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के पूर्व सदस्य रह चुके पूर्व मंत्री और सोलन के कांग्रेस विधायक कर्नल धनीराम शांडिल ने शूलिनी मेले की तैयारियों के बीच सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। शांडिल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि 22 जून से शुरू हो रहे शूलिनी मेले की आयोजन कमेटी के अध्यक्ष पहले सिटिंग विधायक होते थे।
कांग्रेस सरकार में भाजपा विधायक बिंदल भी इसके अध्यक्ष रहे हैं। इस बार विधायक को अध्यक्ष बनाना तो दूर की बात, मेले में निमंत्रण के लिए बनाए गए कार्ड तक में उनका नाम तक नहीं है। जबकि दून के भाजपा विधायक पम्मी और खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया के नाम तक कार्ड में छापे गए हैं।
वह तो खुद स्थानीय विधायक हैं और पिछले काफी वक्त से इस कमेटी के चेयरमैन भी रहे हैं। पिछली सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने सोलन क्षेत्र के लिए सबसे ज्यादा 463 करोड़ रुपये का बजट लाया। इनसे संचालित योजनाओं के लिए लगाई गईं शिलान्यास पट्टिकाएं तोड़ डाली गईं।
जो उद्घाटन हो रहे हैं, उनकी पट्टिकाओं पर उनका नाम नहीं है। उन्होंने पहले भी सीएम से इस संबंध में शिकायत की है। अब वह मेले में हो रहे भेदभाव के लिए भी सीएम से शिकायत करेंगे। मौके पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि अगर भेदभाव ऐेसे ही जारी रहा तो कठोर कदम उठाए जाएंगे।
बड़े कुछ बोलें तो चुप ही रहना चाहिए: शांडिल
हिमाचल कांग्रेस के अलग-अलग खेमों की लड़ाई के बीच सोनिया गांधी की कोर टीम में रह चुके पूर्व कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने भी हस्तक्षेप किया है। शांडिल ने वीरभद्र के जुबानी हमले पर प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को नसीहत दे डाली है कि बड़े नेता कुछ बोलें तो चुप रहना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह बात इशारों में वीरभद्र और सुक्खू के नाम लिए बगैर ही कही। वीरवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में डॉ. शांडिल ने कहा कि नेताओं में शालीनता का होना जरूरी है। पूर्व में शिमला से सांसद रह चुके शांडिल ने पत्रकारों के सवालों पर कहा कि अगर हाईकमान ने चाहा तो वे शिमला से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
वे पार्टी में सिपाही की तरह रहे हैं। हाईकमान ने उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी में नियुक्त किया तो वहां भी निष्ठा से काम किया। प्रभारी महासचिव के रूप में उन्हें बाहरी राज्यों की जिम्मेवारी दी गई तो इसे भी पूरे मन से निभाया। 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ने के आदेश दिए तो वे लडे़ और पिछली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे।
अगर हाईकमान शिमला सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का आदेश करेगी तो यह स्वीकार होगा। यह सब आलाकमान को तय करना है। उनके साथ एआईसीसी के सदस्य और पूर्व पार्टी महासचिव कुलदीप राठौर भी उपस्थित रहे।