घोषणा पत्र में मांगें शामिल करने वाले दल को ही समर्थन देंगे ये कर्मचारी
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प्रदेश की सियासत में कर्मचारी अहम भूमिका निभाते हैं। इस बार भी कर्मचारियों का रुख प्रदेश में बनने वाली आगामी सरकार की भूमिका तय करेगा। चुनाव की इस बेला में शिक्षकों ने भी मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए भाजपा और कांग्रेस पर दबाव डालने की राजनीति शुरू कर दी है।
राजकीय अध्यापक संघ ने जेपी नड्डा और कौल सिंह ठाकुर को मांगपत्र सौंपकर शिक्षकों की विभिन्न मांगों को अपने घोषणापत्रों में शामिल करने की मांग की है। उधर, नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता का लाभ मांग रहे अनुबंध शिक्षकों ने भी दोनों दलों से उनकी मांगों को घोषणापत्रों में शामिल करने की अपील की है।
शिक्षकों ने दबाव की राजनीति करते हुए दोनों दलों को चेताते हुए कहा है कि जो भी दल घोषणापत्र में उन्हें तवज्जो देगा, उसे ही विधानसभा चुनाव में समर्थन दिया जाएगा। हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया और पूर्व महासचिव राजेश वर्मा ने कहा है कि राजनीतिक दलों को अपने घोषणा पत्र में अनुबंध कर्मियों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता लाभ
देने और पुरानी पेंशन योजना बहाली को शामिल करना चाहिए। निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत नियुक्त सभी अनुबंध कर्मियों को एक समान अनुबंध नीति की घोषणा और अनुबंध से नियमित हुए शिक्षकों व अन्य कर्मियों को इनिशियल वेतनमान देने को भी अपने घोषणापत्र में शामिल करना चाहिए।
ये हैं प्रमुख मांगें
उधर, राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और जिला शिमला इकाई अध्यक्ष महावीर कैंथला ने वीरवार को शिमला में केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को मांग पत्र सौंपा।
संघ के राज्य महासचिव नरेश महाजन, मंडी जिला इकाई अध्यक्ष अश्वनी गुलेरिया, महासचिव तिलक नाईक ने कौल सिंह ठाकुर को मांगपत्र सौंपा। बिलासपुर जिला इकाई अध्यक्ष राकेश संधू, महासचिव यशवीर रणौत, सुशील चंदेल ने भाजपा नेता रणधीर शर्मा को मांगपत्र सौंपा।
ये हैं प्रमुख मांगें
चौहान ने बताया कि संघ के मांगपत्र में मुख्यत: पुरानी पेंशन दोबारा शुरू करने, 4-9-14 टाइम स्केल देने, अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने, नए ग्रेड पे को बसिक पे का भाग बनाने, नए ग्रेड पे के लिए दो वर्ष सेवाकाल की शर्त समाप्त करने, अनुबंध से नियमित अध्यापकों व कर्मचारियों को उनकी अनुबंध की प्रथम नियुक्ति से उनको पद वरिष्ठता लाभ देने सहित कई अन्य मांगें शामिल हैं।