कालिया ने दिखाए तेवर, सरकार को दी चेतावनी
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सीपीएस का पद छोड़ने के बाद राकेश कालिया ने अब सरकार की ओर से मनोनीत अन्य समितियों से भी किनारा कर लिया है। कांग्रेस सरकार और संगठन में गगरेट हलके की कथित उपेक्षा का नतीजा है कि कालिया का सियासी गुब्बार फूट पड़ा है और वह अपने ही संगठन के खिलाफ हो गए हैं।
गगरेट से विधायक राकेश कालिया ने कहा कि वह अपने स्टैंड पर कायम हैं। उनका कहना है कि संगठन और सरकार में उनके समर्थकों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। कुछ लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। अगर उन्हें जल्द बहाल नहीं किया गया तो वह कोई और कठोर कदम भी उठा सकते हैं।
बकौल राकेश कालिया मेरे लिए संगठन के साथ-साथ गगरेट की जनता और कार्यकर्ता और उनके हित सर्वोपरि हैं। वहीं, जिला कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र धर्माणी का कहना है कि कांग्रेस जिले में एकजुट है। अगर किसी तरह का मनमुटाव होगा भी तो वह प्रदेश स्तरीय मसला है। इसका समाधान प्रदेश स्तर पर ही होगा।
विक्रमादित्या की दखलअंदाजी से हैं खफा
कालिया ने युकां अध्यक्ष व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य की ओर से सरकार के निर्णयों में अनावश्यक दखल की बात कही है। इसी वजह से कालिया ने सीपीएस के पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है।
हिमाचल के कांग्रेस नेताओं में ‘इस्तीफों’ का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। मुख्य संसदीय सचिव राकेश कालिया के कई कमेटियों से इस्तीफे के बाद फिर से पार्टी के भीतर की सियासत गरमा गई है।
कालिया ने राज्य सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बनने के थोड़े समय के बाद ही यह पद छोड़ दिया था। अब उनके नए इस्तीफों से सियासत गरम हो गई है। जीएस बाली और कौल सिंह ठाकुर के इस्तीफे भी खूब चर्चा में रह चुके हैं।