एनजीटी के फैसले के बाद रोहतांग दर्रे को लेकर आई अच्छी खबर
हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का सकारात्मक असर दिख रहा है। एक तरफ डीजल और पेट्रोल वाहनों की संख्या सीमित होने से पर्यटकों को रोहतांग पहुंचना आसान हुआ है वहीं दूसरी तरफ गतिविधियों पर अंकुश से रोहतांग में बिछी रहने वाली बर्फ की मोटी चादरों की आयु भी बढ़ गई है।
यह जानकारी एनजीटी के जरिए नियुक्त लोकल कमिश्नर एडवोकेट ऋत्विक दत्ता ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में दी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में आदेशों पर अमल को जरूरी बताते हुए सिफारिशें भी दी गई हैं।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लिए गए हिमाचल प्रदेश के मामले पर सुनवाई 31 मई के लिए टाल दी। इस दौरान एनजीटी में स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। इस मामले पर एनजीटी मंगलवार को सुनवाई करेगा।
9 मई को एनजीटी ने दिया था विस्तृत आदेश
एनजीटी ने 9 मई को विस्तृत आदेश दिया था। इस आदेश में प्रधान बेंच ने शर्तों के साथ निचले इलाकों में पैराग्लाइडिंग को इजाजत दी थी। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन के विकास को लेकर भी कोर्ट कमिश्नर को जांच कर रिपोर्ट व सिफारिशें पेश करने को कहा था।
स्टेटस रिपोर्ट की कुछ अहम बातें और सिफारिशें
-पेट्रोल-डीजल वाहनों की संख्या से पर्यटक आसानी से रोहतांग दर्रा पहुंच रहे हैं। पहले जहां समय 6 से 7 घंटे लगता था अब यह समय घटकर 2 घंटे तक हुआ है। गाड़ियां कम होने से रास्ते में भीड़ कम हुई है।
-एनजीटी के आदेशों पर अमल हो रहा है। इसका रोहतांग और इर्द-गिर्द के पर्यावरण पर असर दिखाई दे रहा है। बेहतर परिणाम के लिए इस पर अमल करते रहना होगा।
-रोहतांग दर्रे पर पर्यावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। खासतौर से स्नो स्कूटर्स को इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधि की जा सकती है। निचले इलाकों में गतिविधियों को मंजूरी दी जा सकती है।
-व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य कारणों से हटाए गए लोगों का जल्द से जल्द पुनर्वास किया जाना चाहिए।
-प्रतिबंध और आदेशों पर अमल के लिए सख्ती बरतनी होगी।