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Shimla News: खराब टैबलेट बेचने पर कंपनी और डीलर को पैसा लौटाने का आदेश

Tue, 22 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:59 PM IST
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Company and dealer ordered to refund money for selling defective tablets.
ऑनलाइन खरीदे टैब की स्क्रीन में आई थी खराबी, अब 40 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश
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कंपनी ने टैबलेट बदलने से कर से दिया था इन्कार
रुचि सांख्यान
शिमला। ऑनलाइन खरीदे टैबलेट में खराबी आने और वारंटी अवधि के दौरान समाधान न करने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने सख्त रुख अपनाया है।
आयोग ने सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से उपभोक्ता को टैबलेट की पूरी कीमत 53,199 रुपये लौटाने के साथ मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे के खर्च के रूप में 40 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया है। संजौली निवासी पंकज राणा ने 27 सितंबर 2020 को 53,199 रुपये में सैमसंग गैलेक्सी टैब एस 7 (वाई-फाई) का ऑनलाइन ऑर्डर दिया था। कुरिअर के जरिये यह प्रोडक्ट 30 सितंबर 2020 को मिला। उपयोग शुरू करने के कुछ ही दिनों के भीतर टैबलेट की स्क्रीन पर ब्राइट स्पॉट दिखाई देने लगा और डार्क बैकग्राउंड पर स्क्रीन फ्लिकर करने लगी।
उपभोक्ता ने कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने ईमेल के जरिये खराबी दूर करने, टैबलेट बदलने या पैसे वापस करने की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।ईमेल पर पहले तो कंपनी ने समस्या सुलझाने का भरोसा दिया लेकिन बाद में यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि शिकायत डिलीवरी के 24 से 48 घंटे के भीतर दर्ज नहीं करवाई गई। सुनवाई के दौरान सैमसंग ने दलील दी कि उत्पाद की वारंटी केवल पार्ट्स की मरम्मत के लिए थी बदलने के लिए नहीं और शिकायतकर्ता ने कोई तकनीकी विशेषज्ञ रिपोर्ट पेश नहीं की है। वहीं डीलर ने तर्क दिया कि वह केवल अधिकृत वितरक हैं, इसलिए मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के लिए निर्माता कंपनी ही जिम्मेदार है।
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आयोग की दो टूक
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उत्पाद एक साल की वारंटी अवधि के भीतर ही खराब हुआ था। आयोग ने टिप्पणी की कि जब टोल-फ्री नंबर पर संपर्क न होने के बाद ग्राहक ने ईमेल किया तो कंपनी को उसे नजदीकी सर्विस सेंटर भेजने का सुझाव देना चाहिए था लेकिन कंपनी ने नियमों की आड़ लेकर ग्राहक की परेशानी को और बढ़ा दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि डीलर भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता क्योंकि ग्राहक को दिए जाने वाले उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करना उसका कानूनी दायित्व है। आयोग ने आदेश की प्रति मिलने के 45 दिन के भीतर इस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
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