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सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: मजहब की दीवारों से ऊपर उठकर जीनत खान ने रोशन की गरीब परिवारों की दिवाली

Sat, 07 Nov 2026 02:05 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 07 Nov 2026 02:05 PM IST
सार

हर वर्ष की तरह इस बार भी जीनत खान ने नाहन शहर और आसपास के गांवों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों तक दिवाली की खुशियां पहुंचाईं। उन्होंने परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कपड़े, मिठाइयां, राशन किट, खाद्य तेल, दीपक, अखरोट, अगरबत्ती और पूजा सामग्री वितरित की।

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communal harmony example: Rising above the barriers of religion, Zeenat Khan brought light to the Diwali celeb
जीनत खान ने रोशन की गरीब परिवारों की दिवाली। - फोटो : संवाद

विस्तार

त्योहार खुशियां बांटने और रिश्तों में मिठास घोलने का अवसर होते हैं। इनका कोई मजहब नहीं होता। इसी भावना को आत्मसात करते हुए नाहन की समाजसेविका जीनत खान ने दिवाली पर जरूरतमंद परिवारों की खुशियों में शामिल होकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की। हर वर्ष की तरह इस बार भी जीनत खान ने नाहन शहर और आसपास के गांवों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों तक दिवाली की खुशियां पहुंचाईं। उन्होंने परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कपड़े, मिठाइयां, राशन किट, खाद्य तेल, दीपक, अखरोट, अगरबत्ती और पूजा सामग्री वितरित की। बच्चों के लिए पटाखों का भी इंतजाम किया। आर्थिक तंगी के बीच त्योहार की यह सौगात पाकर परिवारों के चेहरों पर मुस्कान खिल उठी।

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हर धर्म के त्योहार पर मदद को बढ़ाती हैं हाथ
जीनत खान की यह पहल केवल दिवाली तक सीमित नहीं है। वह होली, तीज, करवा चौथ और ईद सहित विभिन्न त्योहारों पर जरूरतमंदों की मदद करती रही हैं। उनका मानना है कि धर्म और मजहब से ऊपर इंसानियत है। एक-दूसरे के त्योहारों और खुशियों में शामिल होने से ही समाज में प्रेम, भाईचारा और आपसी विश्वास मजबूत होता है।

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सच्ची दिवाली तभी, जब हर घर में जले दीपक
जीनत खान ने कहा कि दिवाली की असली खुशी तभी है, जब समाज के हर वर्ग के घर में दीप जले और हर चेहरे पर मुस्कान हो। उनका उद्देश्य सिर्फ त्योहार मनाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को यह एहसास कराना है कि उनकी खुशियों में भी समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि इंसानियत और सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। भविष्य में भी हर त्योहार पर जरूरतमंद परिवारों की मदद का सिलसिला जारी रहेगा। जीनत खान की यह पहल संदेश देती है कि धार्मिक पहचान भले अलग हो, लेकिन खुशियां और संवेदनाएं साझा हैं। जरूरतमंदों की दिवाली रोशन कर उन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर पेश की है।

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