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मणिमहेशः महाकाली कुंड में इस बार दी जाएगी इसकी बलि

Thu, 17 Sep 2015 03:21 PM IST
Updated Thu, 17 Sep 2015 03:21 PM IST
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coconut will be offered at manimahesh, no animal sacrifice.

मणिमहेश डल झील के महाकाली कुंड में इस बार मेढ़े की जगह नारियल की बलि चढ़ाई जाएगी। प्रशासन और शिव चेलों के बीच चल रहा विवाद आखिरकार न्यायालय के फैसले के पक्ष में सुलझ गया है। भरमौर के लोगों की मुख्य देवी बन्नी माता मंदिर (महाकाली का स्वरूप) में धार्मिक अनुष्ठान के बाद महाकाली के गूर ने दैवीय आज्ञा के बाद इस बात की इजाजत दी है।

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अनुमति के अनुसार मणिमहेश डल झील के बीचोंबीच स्थित महाकाली कुंड में नारियल की बलि देकर भी शाही स्नान के पर्व को आयोजित किया जा सकता है। देव चेलों में धर्म सिंह, पवन कुमार, चमन लाल और विजय कुमार का कहना है कि अगर यह दैवीय आज्ञा नहीं मिलती तो उनमें से कोई भी बिना बलि के मणिमहेश डल झील में उतरने का साहस नहीं कर सकता था।
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ऐसे में विवाद समाप्त हो जाने के बाद मणिमहेश डल झील में शाही स्नान शुरू हो सकेगा। उधर, शाही स्नान के दिन होने वाली प्रक्रिया पर नजर डालें तो लगभग हर प्रकार की औपचारिकता पूरी हो गई हैं। चंबा से दशनाम अखाड़ा और चरपट नाथ की छड़ी यात्रा रवाना होने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर से आने वाले यात्रियों की टोली भी अपने-अपने गंतव्यों तक पहुंच चुकी हैं, जोकि भरमौर से लेकर मणिमहेश डल झील तक डेरा डाले हुए हैं।
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क्या कहते हैं देवता के गुर

coconut will be offered at manimahesh, no animal sacrifice.

हिंदू धर्म में किसी जीव की बलि के जगह पर नारियल की बलि देने का विधान मौजूद है। ऐसे में हिंदू धर्म की इस धार्मिक सहनशीलता ने एक सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अस्तित्व बचाए रखने में अपने आप को सार्थक साबित किया है।

क्या था मामला
मणिमहेश डल झील में शाही स्नान को शिव के चेले उतरते हैं। जिसे डल तोड़ने की परंपरा कहते हैं। कहा जाता है कि डल के बीच काली माता का कुंड है, जिसे पार करने से पूर्व बलि देनी पड़ती है, लेकिन हिमाचल में पशु बलि पर रोक की वजह से सारा मामला विवादित हो गया था और शिव के चेलों ने डल तोड़ने से इंकार कर दिया था। अब सभी चेले नारियल के सहारे डल पार करने को तैयार हैं।

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