राज्यपाल के बयान पर सीएम वीरभद्र का करारा जवाब
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में राज्यपाल शासन लागू नहीं है। प्रदेश में जनता की ओर से चुनी हुई एक लोकतांत्रिक सरकार है। यह सरकार लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेश में अपना काम कर रही है।
वह शुक्रवार को सचिवालय में वर्तमान राज्यपाल कल्याण सिंह और पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह की टिप्पणी और पत्र पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने एएन शर्मा मामले में साफ किया कि स्टेट विजिलेंस की ओर से धूमल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा एएन शर्मा को सेवा विस्तार देना एक गंभीर मामला है।
फाइल भेजकर नहीं की कोई गलती
इस्तीफा देने के बाद उन्हें फिर से सरकार भारतीय पुलिस सेवा में वापस नहीं ले सकती थी। क्योंकि, उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए भारतीय पुलिस सेवा से त्याग पत्र दिया था। इस अपराध को छोटा नहीं आका जा सकता।
उर्मिला सिंह की ओर से सरकार को भेजे गए पत्र पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अफसरों ने धूमल के खिलाफ केस चलाने के लिए अभियोजन मंजूरी की फाइल राजभवन भेजकर कोई गलत काम नहीं किया है।
ऐसे में कार्रवाई करने का कोई मतलब नहीं बनता। युवा कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट पर राज्यपाल कल्याण सिंह की ओर से दिए गए बयान और डीजीपी से रिपोर्ट तलब करने पर पूछे गए सवाल पर वीरभद्र ने कहा कि प्रदेश में राज्यपाल शासन नहीं है।
ये कहा था कल्याण सिंह ने
30 जनवरी को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कल्याण सिंह ने भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर युवा कांग्रेस के प्रदर्शन को अलोकतांत्रिक करार दिया था। उन्होंने शिमला में भाजपा और युकां कार्यकर्ताओं में हुई खूनी झड़प को निंदनीय कहा था। हिमाचल प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की थी। साथ ही प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से भी रिपोर्ट तलब की थी।
उर्मिला ने पत्र में क्या लिखा था- तत्कालीन राज्यपाल उर्मिला सिंह ने प्रदेश सरकार को इस मामले से जुड़े पूरे तथ्य न रखने पर अफसरों के खिलाफ मेजर पेनल्टी लगाने को कहा था। राजभवन की ओर से 20 जनवरी 2015 को अभियोजन मंजूरी की जो फाइल वापस लौटाई गई थी, उसी के साथ भेजे पत्र में सरकार को संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।