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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मिले सीएम वीरभद्र, रखी ये मांग

Tue, 09 Aug 2016 09:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 09 Aug 2016 09:10 AM IST
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cm virbhadra singh meeting with environmental minister anil madhav dave

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे से भेंट कीं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का लंबित पर्यावरण स्वीकृतियों पर ध्यान आकर्षित किया। कहा कि इसकी वजह से सरकार सड़कों, जल विद्युत और सिंचाई परियोजनाओं के लिए कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

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जलविद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरियों की शक्तियां सरकार को देने की जरूरत है। वन भूमि का गैर वानिकी कार्यों को बदलने का मामला भी उठाया। कहा कि प्रदेश में मौजूदा एक हेक्टेयर भूमि के परिवर्तन की शक्तियों को 10 हेक्टेयर तक बढ़ाने के सरकार के आग्रह को स्वीकार किया जाए।
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सीएम ने केंद्रीय राज्य मंत्री से कहा कि भारत सरकार की ओर से हस्तांतरण प्रस्तावों पर सहमति न देने के कारण जल विद्युत परियोजनाओं के लगभग 57 मामले, अनेक खनन परियोजनाएं और राष्ट्रीय महत्व की रोहतांग सुरंग परियोजना भी प्रभावित हुई है। गत वर्ष से वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत कोई भी वन स्वीकृति नहीं दी है।
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जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृति की शक्तियों के मामले प्रभावी ढंग से उठाते हुए सीएम ने चिंता जताई कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से पर्यावरण स्वीकृति में देरी के कारण रन ऑफ द रिवर जल विद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अनावश्यक देरी हो रही है।

रन ऑफ द रिवर परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी की शक्ति भी बढ़ाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 मेगावाट क्षमता से अधिक की परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरियां देने की शक्तियां केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को हैं। राज्य को शक्तियां देने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 को लागू करने की जरूरत नहीं है। अधिनियम के जिन प्रावधानों के तहत सरकार को 50 मेगावाट से कम क्षमता वाली परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी की शक्तियां दी गई हैं, उन्हीं के तहत सभी रन ऑफ द रिवर जल विद्युत परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी की शक्ति को बढ़ाया जा सकता है।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने आश्वस्त किया अनिल दवे को
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि पहाड़ी राज्य के लोगों की विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।


आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य में उपलब्ध व्यापक जल विद्युत क्षमता के दोहन में एक भागीदार के रूप में कार्य करना चाहती है। मुख्य सचिव वीसी फारका और मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार टीजी नेगी भी बैठक में उपस्थित थे।

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