पढ़िए, सीएम वीरभद्र का ये एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
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लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार धर्मशाला पहुंचे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के विवाद पर निर्णायक कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस मसले पर अब वह सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करेंगे। सोमवार सुबह शिमला से धर्मशाला रवाना हुए वीरभद्र सिंह ने हेलिकॉप्टर में अमर उजाला से विशेष बातचीत की। पेश हैं उसके अंश -
अमर उजाला - कांगड़ा में सीयू के लिए प्रस्तावित दूसरी साइट को भी केंद्र ने खारिज कर दिया है। अब पालमपुर और नूरपुर आदि क्षेत्रों से भी मांग उठ रही है। ये विवाद कैसे खत्म होगा?
मुख्यमंत्री - सीयू को ओछी राजनीति में उलझाया जा रहा है। सांसद अनुराग ठाकुर के हस्तक्षेप के कारण राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित साइट को खारिज किया गया है। इसलिए मैं इस बारे में खुद प्रधानमंत्री से बात करूंगा। विवि कांगड़ा में ही खुलनी चाहिए। हम तो धर्मशाला और देहरा वाले फार्मूले पर भी तैयार हैं।
एम्स पर कोई असमंजस नहीं: सीएम
अमर उजाला - केंद्र हिमाचल को एम्स देना चाहती है, लेकिन टांडा, ईएसआई नेरचौक या नए स्थान पर ये संस्थान होगा, इस पर असमंजस है। आपका मत क्या है?
मुख्यमंत्री - कोई असमंजस नहीं है। कुछ लोग इस मसले पर राजनीतिक रस्साकशी करना चाहते हैं। इसलिए कभी टांडा का नाम उछालते हैं तो कभी नेरचौक का। सरकार सही समय पर लोगों के हित में फैसला लेगी।
अमर उजाला - एचपीसीए को लेकर केस कोर्ट में चल रहे हैं। आपने पहले स्पोर्ट्स बिल या अध्यादेश लाने की बात कही थी। धर्मशाला में हुए वनडे मैच में भी आप नहीं आए। अब क्या कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे?
मुख्यमंत्री - एचपीसीए मामले में सरकार के क्षेत्राधिकार पर कोर्ट केस कोई बाधा नहीं हैं। सरकार के पास कई कानूनी विकल्प हैं। हम क्रिकेट को एक परिवार और एक गुट के कब्जे से मुक्त करवाने को प्रतिबद्ध हैं। सरकारी जमीन हथियाने के बाद सोसाइटी को कंपनी बनाकर इसका मालिक बन जाना न सिर्फ क्रिकेट बल्कि समाज के प्रति भी बड़ा अपराध है।
मैं नए जिले के खिलाफ हूं
अमर उजाला - प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू चाहते हैं कि संगठन के काम को बेहतर चलाने के लिए नए संगठनात्मक जिले होने चाहिए। आपका मत क्या है?
मुख्यमंत्री - मैं व्यक्तिगत तौर पर नए जिलों के खिलाफ हूं। फिर चाहे नए जिले संगठन के हों या प्रशासन के। आज जो जिले संगठन के लिए बनेंगे, ऐसी पूरी संभावना हैं कि वहां के लोग कल को प्रशासनिक रूप से भी नए जिलों की मांग उठाएं। हमारी वित्तीय स्थिति नए जिलों का भार उठाने लायक नहीं है।
अमर उजाला - राज्यों के प्रति मोदी सरकार का रुख कैसा है? हिमाचल को न तो कोई आर्थिक पैकेज मिला, न ही आपदा राहत। क्या योजना आयोग निरस्त होने का कोई असर हिमाचल पर भी पड़ा है?
मुख्यमंत्री - देखिए, मैं फिलहाल ये नहीं कह सकता कि मोदी सरकार का रुख हिमाचल के लिए ठीक नहीं है। लेकिन प्लानिंग कमीशन निरस्त होने से हमारा धन आवंटन प्रभावित हुआ है। इसलिए मोदी को कन्फ्यूजन जल्द खत्म करना चाहिए। इस बारे में वह भारत सरकार को पत्र भी लिख रहे हैं।
शिक्षकों के बारे में ये कहा
अमर उजाला - आप शिक्षा विभाग भी संभाल रहे हैं। पैट और पीटीए के मसले कोर्ट में हैं। अब एसएमसी की भर्तियों से शिक्षित बेरोजगारों को लग रहा है कि बैक डोर एंट्री से उनके साथ धोखा हो रहा है। ऐसी भर्तियां क्या जायज हैं?
मुख्यमंत्री - राज्य सरकार के सामने वित्तीय मजबूरियां हैं। हमने नए स्कूल खोल दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 600 से अधिक स्कूल पिछले डेढ़ साल में खुले हैं, इन्हें शिक्षक भी चाहिए। इसलिए एसएमसी के माध्यम से नियुक्तियां कर रहे हैं। सभी पदों पर हम नियमित भर्तियां नहीं कर सकते। जहां तक पैट और पीटीए की बात है तो इनकी सेवाएं नियमित करने की दिशा में सरकार बढ़ रही थी, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप से प्रक्रिया रुक गई।
अमर उजाला - कांगड़ा के कंदरोड़ी में स्टील प्लांट आपके केंद्रीय मंत्री रहते तैयार हो गया था। इसके बाद सेना के कोर्ट जाने से प्लांट ठप पड़ा है। इसे शुरू करवाने के लिए क्या वैकल्पिक रास्ता खोजा जाएगा?
मुख्यमंत्री - ये स्टील प्लांट स्थापित हो चुका है। मैं खुद हैरान हूं कि सेना ने तब आपत्ति नहीं उठाई, जब ये बन रहा था। जब उत्पादन शुरू होने वाला था तो अचानक सेना को याद आई कि सैन्य डिपो के पास ऐसा उद्योग नहीं हो सकता। हमने भारत सरकार में उच्चतम स्तर पर मसला उठाया है। कुछ अच्छा होने की उम्मीद है।