शांता और धूमल के करीबी रहे पूर्व मंत्रियों की ताजपोशी अटकी
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दो पूर्व मुख्यमत्रियों शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल के करीबी रहे दो पूर्व मंत्रियों की बडे़ ओहदों पर ताजपोशी अटक गई है। यह मामला जयराम सरकार के पहले मानसून सत्र में भी फंसा रह सकता है। पूर्व मंत्री रमेश धवाला और नरेंद्र बरागटा चीफ व्हिप और डिप्टी चीफ व्हिप के पदों के सशक्त दावेदार हैं। दोनों पदों पर इनकी नियुक्तियों के बाद इन्हें कैबिनेट रैंक की सुविधाएं दी जानी प्रस्तावित हैं। जयराम सरकार के पहले बजट सत्र में इन दोनों पदों के सृजन के लिए एक विधेयक पारित किया गया, जिसने राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप ले लिया है।
मुख्यमंत्री के रूप में जयराम ठाकुर ने शपथ ग्रहण की तो उनकी कैबिनेट में 11 मंत्रियों ने भी शपथ ली। तीन पूर्व मंत्री जयराम कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाए। ये रमेश धवाला, नरेंद्र बरागटा और डॉ. राजीव बिंदल हैं। विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली तो वरिष्ठ होने के नाते रमेश धवाला को प्रोटेम स्पीकर बना दिया गया।
यह एक दिन की तात्कालिक व्यवस्था थी। कैबिनेट में नहीं लिए जाने के बावजूद डॉ. राजीव बिंदल को विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया। दो पूर्व मंत्रियों धवाला और बरागटा की ताजपोशी शेष रह गई। धवाला को पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और बरागटा को पूर्व सीएम प्रेमुकमार धूमल का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में यह विचार किया गया कि कुछ बाहरी राज्यों की तर्ज पर सत्ता पक्ष में एक चीफ व्हिप और दूसरा डिप्टी चीफ व्हिप का पद सृजित किया जाए।
इन्हें कैबिनेट रैंक के बराबर की सुविधाएं दी जाएं। इस तरह से इन दोनों का तुष्टिकरण किया जा सकता है। इसके लिए बजट सत्र में बिल पेश किया गया। इसे विपक्ष के विरोध पर भी पारित कर दिया गया। इस पर राज्यपाल की मंजूरी आने के बाद भी नियुक्ति का यह मामला फंसा हुआ है।
मानसून सत्र में इनकी नियुक्तियां होंगी कि नहीं? इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी बरसात के बाद ही तमाम तरह की नियुक्तियां करने की बात की। इससे यह संदेह और भी मजबूत हो गया है कि वरिष्ठ विधायक इस ताजपोशी से शायद इस सत्र में भी वंचित रह जाएं। पूर्व मंत्री रमेश धवाला बताते हैं कि वह इस पर कई बार अपनी बात रख चुके हैं। नरेंद्र बरागटा ने भी कोई टिप्पणी करने से इंकार किया।