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हिमाचल अपनाएगा ऐसी खेती, किसान सालभर खर्च नहीं करेगा एक पैसा

Tue, 30 Jan 2018 10:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पालमपुर(कांगड़ा)
अमर उजाला ब्यूरो, पालमपुर(कांगड़ा) Updated Tue, 30 Jan 2018 10:09 AM IST
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cm jairam thakur urgud agriculture scientist to double the income of farmers till 2022

हिमाचल ऐसी खेती अपनाएगा। इससे किसान सालभर एक पैसा खर्च नहीं करेगा। हिमाचल सरकार अब शून्य लागत से होने वाली प्राकृतिक खेती को अपनाएगी। इसमें किसान सालभर अपनी खेती पर खाद, कीटनाशकों पर एक पैसा नहीं खर्च करेगा। 

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उत्पाद जहर मुक्त होंगे, जिसकी आज बाजार में सबसे ज्यादा मांग है। इस खेती से जमीन की उत्पादकता तो बढ़ेगी ही साथ ही पानी का कम उपयोग होगा। मित्र कीट भी नहीं मरेंगे। इसकी शुरुआत सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कृषि विवि पालमपुर में शून्य बजट प्राकृतिक कृषि केंद्र की नींव रखकर की। 
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इसमें कृषि विवि के वैज्ञानिक किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देंगे। इस दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को शून्य लागत से होने वाली खेती के टिप्स दिए। 

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राज्यपाल के गुरुकुल स्थित फार्म हाऊस का दौरा करेंगे

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कृषि विवि में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जयराम ने कहा कि राज्य की 90 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषि कार्यक्रमों और शोधों का किसानों को सीधा लाभ मिलना चाहिए।

प्रदेश में 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होनी चाहिए। इस पायलट परियोजना को अपनाकर सिक्किम राज्य को पछाड़ना है। प्राकृतिक खेती को लेकर वह, उनके मंत्री और कुछ अधिकारी पांच फरवरी को राज्यपाल के फार्म हाउस गुरुकुल का दौरा करेंगे।

इसके बाद 15 फरवरी को शिमला में पीटरहॉफ में शून्य लागत खेती पर एक कार्यक्रम किया जाएगा। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि रासायनिक और जैविक कृषि के मुकाबले प्राकृतिक खेती अधिक लाभकारी है। इस प्रणाली में कृषि वैज्ञानिक अहम भूमिका निभा सकते हैं और ग्राम स्तर से आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता है।

कैसे करें शून्य लागत से खेती 

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राज्यपाल ने बताया कि किसान शून्य लागत से कैसे खेती कर सकता है। उन्होंने बताया कि एक ड्रम लें और उसमें 180 लीटर पानी भरें। इसमें एक दिन का दस किलो गोबर और गोमूत्र डालें। इसमें गुड़, बेसन और छायादार पेड़ के नीचे की मिट्टी डालें।

चार-पांच दिन तक इस घोल को हिलाएं और इसके बाद फसलों पर छिड़काव करें। इससे कीट मरते नहीं बल्कि भाग जाते हैं। इससे न पशु-पक्षी मरेंगे और न ही आपकी फसल में जहर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अपनी पशुशाला को ऐसे बनाएं कि मूत्र एक गड्ढे में इकट्ठा हो जाए। 

व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर शोध साझा करें वैज्ञानिक
कृषि मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने कहा कि राज्य में किसानों ने वर्ष 2015-16 में 523 मीट्रिक टन कीटनाशकों का प्रयोग किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। घातक बीमारियाें का कारण बन रहे हैं। कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों को शोध को साझा करने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाने के निर्देश दिए।

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