पानी के लिए हाहाकार, सीएम ने आपात बैठक में लिया बड़ा फैसला, टोल फ्री नंबर जारी
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हिमाचल के कई हिस्सों में गहराए जल संकट के बीच मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की आपात बैठक बुलाई। पेयजल स्रोत सूखने से जिला सिरमौर, शिमला, हमीरपुर, मंडी, सोलन और बिलासपुर के कई हिस्सों में स्थिति चिंताजनक बन गई है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में अफसरों को निर्देश दिए गए कि जहां स्रोत सूख रहे हैं, वहां आबादी वाले क्षेत्रों में हैंडपंप और टैंकरों से पानी की सप्लाई की जाए।
सरकार ने पानी की किल्लत और शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 18001808009 जारी किया है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में वर्षा जल संग्रहण को भारत सरकार से निधिकरण के लिए 4751 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां वर्षा जल नीचे की ओर बह जाता है और इसका उपयोग नहीं हो पाता।
सरकार प्रभावी जल संरक्षण को वर्षा जल संग्रहण ढांचों का निर्माण कर पानी की बर्बादी रोकने पर विचार कर रही है। सरकार ने प्रदेश के लोगों को पर्याप्त पानी देने के लिए 1421 जलापूर्ति योजनाओं के पुन: निर्माण पर 798 करोड़ का एक अन्य प्रस्ताव निधिकरण के लिए केंद्र को भेजा है।
अधिकारियों को दिए ये निर्देश
उन्होंने अधिकारियों को पाइप लाइनों में रिसाव रोकने के निर्देश दिए। कहा कि हिमाचल में पर्यटन सीजन चरम पर है। सैलानियों तथा लोगों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। गत वित्त वर्ष के दौरान खरीदे गए 20056 मीट्रिक टन पाइपों के मुकाबले वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान 21502 मीट्रिक टन पाइपों की खरीद की जाएगी।
पुराने पाइप बदलने को दी पर्याप्त धनराशि- सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि पुराने पाइप लाइन बदलने को पर्याप्त धनराशि दी गई है। राज्य में लंबे समय से सूखे जैसी स्थिति बनी है। सरकार सुनिश्चित कर रही है कि लोगों को पानी की कमी न हो।
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सचिव देवेश कुमार ने हिमाचल में पानी की स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट की। इस दौरान विधायक प्रकाश राणा, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी, प्रमुख अभियंता सुमन विक्रांत और केआर धीमान समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।