सुकून देता है मंदिरों का शहर मंडी
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छोटी काशी के नाम से मशहूर सांस्कृतिक नगरी मंडी में संगमन-20 का होना अपने आपमें ऐतिहासिक घटना रही है। मंडी में छठे दशक के दौरान यायावर साहित्यकार तथा संस्कृति कर्मी महापंडित राहुल सांकृत्यायन का आना अपने आपमें ऐतिहासिक घटना रही है।
उस समय के नौजवान और वर्तमान में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सुंदर लोहिया, कृष्ण कुमार नूतन, चंद्रमणी कश्यप, हुताशन शास्त्री और डा. बीएल कपूर को उस समय राहुल सांकृत्यायन का सानिध्य प्राप्त हुआ था। वहीं क्रांतिकारी साहित्यकार यशपाल की कहानियों और अज्ञेय के यात्रा संस्मरणों में भी मंडी का जिक्र आता रहा है।
जबकि, नई कहानी की त्रिमूर्ति के एक स्तंभ मोहन राके श का प्रवास भी मंडी में रहा है। मंडी को उन्होंने अपनी नदी का अपना शहर कह कर पुकारा था। प्रगतिशील कवि त्रिलोचन, प्रख्यात आलोचक नामवर, कहानीकार संपादक कमलेश्वर का मंडी आना भी ऐतिहासिक घटना रही है। इसी कड़ी में अब संगमन -20 का मंडी में होना इस ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक शहर के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। प्रख्यात साहित्यकार गिरिराज किशोर का कहना था कि इस ऐतिहासिक शहर में आना उनके लिए सुकून भरा रहा।
संगमन में आए साहित्यकारों ने सराहा
वे कई सालों से यहां आना चाहते थे। उन्होंने कहा कि मंडी के साहित्यकार सुंदर लोहिया उनके समय से लिखते आ रहे हैं। संगमन के संयोजक कथाकार प्रियवंद ने कहा कि संगमन के अब तक के आयोजनों में मंडी का आयोजन सबसे सफल रहा है। कथाकार अल्पना मिश्र ने कहा कि वे मंडी की सुखद यादों को अपने साथ लिए जा रही हैं।
संगमन में आए साहित्यकारों ने जहां हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी प्रदेश की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता को एक छत के नीचे देखा। वहीं, पर त्रिवेणी धर्म स्थली रिवालसर भ्रमण के दौरान पर्यटन स्थल की सुंदरता ने भी देश भर से आए साहित्यकारों को भावविभोर कर दिया। उनके साथ गाइड की भूमिका निभाने वाले कथाकार हंसराज भारती ने कहा कि साहित्यकारों ने नैणा देवी, कुंतभ्यो, पदमसंभव गुफा और रिवालसर झील का भ्रमण किया।