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मजदूरों से छिन रहा रोजगार, विधायक बढ़ा रहे अपने भत्ते: तपन

Sat, 14 Sep 2019 06:48 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 14 Sep 2019 06:48 PM IST
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CITU national general secretary Tapan Sen press statement in shimla
सीटू के राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन - फोटो : अमर उजाला

सीटू के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सांसद तपन सेन ने कहा कि महंगाई के हिसाब से मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने की मांग की जा रही है लेकिन केंद्र सरकार 178 रुपये दिहाड़ी करने की कोशिश में है जबकि 31 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में दिहाड़ी 250 रुपये तक है। उन्होंने कहा कि देश का निर्यात घट रहा है और देश में खरीदने की क्षमता कम हो रही है। यही कारण है कि देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। 

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इस मंदी के कारण ऑटोमोबाइल उद्योग में लगभग 10 लाख मजदूरों पर छंटनी का खतरा मंडरा रहा है। कई बड़े उद्योगों में तालाबंदी से लगभग 10 हजार मजदूरों की नौकरी चली गई है। उधर, हिमाचल प्रदेश के मंत्री कल्याण की स्कीमों के लिए बजट की कमी का रोना रोते हैं और जब विधायकों के भत्ते बढे़ तो किसी ने भी विरोध नहीं किया।
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प्रदेश वित्तीय संकट से जूझ रहा है और ऐसी स्थिति में विधायकों का भत्ता बढ़ना गलत है। उन्होंने कहा कि एकमात्र माकपा विधायक राकेश सिंघा ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब वह सांसद थे तो ऐेसे बिलों का उन्होंने भी खुलकर विरोध किया था। शनिवार को कालीबाड़ी में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देशी-विदेशी पूंजीपतियों के गठजोड़ से मिलीभगत कर मजदूरों का अहित कर रही है।
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बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। पूंजीपतियों को आयकर में 34 से घटाकर 25 फीसदी कर दिया है। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग पर बढ़ते हमलों और श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ  30 सितंबर को दिल्ली संसद मार्ग पर खुले अधिवेशन में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। 

एसटी और अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ साझा संघर्ष करेगी सीटू 

CITU national general secretary Tapan Sen press statement in shimla

सीटू के राज्य सम्मेलन में देश में अनुसूचित जाति, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ साझा तौर पर आवाज उठाने का संकल्प लिया गया। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध, न्यूनतम वेतन 18 हजार करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। आउटसोर्स भर्तियों, ठेकाप्रथा और अंशकालीन नीति पर रोक लगाने की मांग भी उठी। स्थायी रोजगार और आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने पर छह प्रस्ताव पारित किए गए।

सम्मेलन में महासचिव प्रेम गौतम की रखी गई रिपोर्ट पर 37 प्रतिनिधियों ने करीब छह घंटे तक चर्चा की। शिमला के कालीबाड़ी हाल में 13 से 15 सितंबर तक चलने वाले 13वें सीटू राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को कार्यवाही जारी रही। दूसरे दिन के दूसरे सत्र में सीटू राज्य कमेटी के सम्मेलन में राज्य के असंगठित कामगारों को एकजुट करने की जरूरत भी महसूस की गई। प्रदेश में जिला और ब्लॉक स्तर पर आउटसोर्स कामगारों को एकजुट कर उनके हकों की लड़ाई लड़ने की बात उठी। असंगठित कामगारों को एकसाथ लेकर राज्य में आंदोलन की रूपरेखा बनाने का संकल्प लिया गया।

सम्मेलन में बिजली, आंगनबाड़ी वर्कर्स संघ, होटल मजदूर यूनियन, उद्योगों से जुड़े कामगार संघ, आशा वर्कर संघ, मिड-डे मील वर्कर्स संघ के नेताओं ने कहा कि निचले स्तर पर संगठन के सदस्य बनाएं जाएं। इस दौरान सीटू के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड तपन सेन, डॉ. कश्मीर ठाकुर, जगतराम, प्रेम गौतम, विजेंद्र मेहरा सहित कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। 

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