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लाखों के सीमेंट घोटाले में चार बीडीओ से रिकॉर्ड तलब
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खाद्य आपूर्ति विभाग के सुन्नी डिपो का मामला, 54.93 लाख के बेचे सीमेंट का नहीं है रिकॉर्ड
अब एसआईटी कर रही है घोटाले की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में खाद्य आपूर्ति विभाग के सुन्नी डिपो में 54.93 लाख रुपये के सरकारी सीमेंट के गबन मामले में एसआइटी ने जिला मंडी और शिमला के चार विकास खंड अधिकारियों से रिकॉर्ड तलब किया है।
पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित करने के आदेश दिए हैं। इसमें पुलिस अधीक्षक डॉ. मोनिका भुटूंगरु की अगुवाई में एसपी क्राइम वीरेंद्र कालिया, एएसपी साइबर नरवीर राठौर, डीएसपी सिटी मंगत राम और थाना प्रभारी कर्म चंद को एसआई टीम का सदस्य बनाया है। एसआईटी प्रमुख एसपी डॉ. मोनिका ने बताया कि जिला मंडी के सुंदरनगर, करसोग और जिला के बसंतपुर तथा मशोबरा विकास खंड अधिकारियों को नोटिस जारी कर सीमेंट खरीद से संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड तलब किया है।
सुन्नी डिपो से बसंतपुर, मशोबरा, सुंदरनगर और करसोग विकास खंडों को सीमेंट सप्लाई होता था। इसके अलावा बसंतपुर की 42 पंचायतों, 50 ठेकेदाराें के अलावा आईपीएच और लोक निर्माण विभाग को यहीं से सीमेंट भेजा जाता है। मनरेगा कार्याें के लिए भी यहीं से सीमेंट की सप्लाई होती है। एफआईआर के मुताबिक साल 2016 से 2020 के बीच यह घोटाला हुआ था। ऑडिट में गड़बड़ियां पकड़ने जाने के बाद यह मामला पुलिस को सौंपा था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के कार्यकाल में बेचे सीमेंट का रिकॉर्ड तलब किया था। स्टॉक रजिस्टर और डिपो से किसको कितना सीमेंट आवंटित हुआ तथा डिपो से सीमेंट खरीद करने वालों का रिकॉर्ड मांगा है।
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यह है पूरा मामला
खाद्य आपूर्ति विभाग ने 2020-21 में सुन्नी डिपो का ऑडिट करवाया था तो गड़बड़ियां पकड़ी गईं। आरोपी ने जितना सीमेंट बेचा था उस हिसाब से सरकारी खाते में पैसे जमा नहीं करवाया था। बेचे गए सीमेंट का रिकॉर्ड रजिस्ट्रर में दर्ज नहीं है। साल 2016 से 2020 तक दुष्यंत कुमार सुन्नी में बतौर पब्लिक डिस्ट्रीब्यूटर हेल्पर (पीडीएच) पद पर कार्यरत था। इसी आधार पर प्रदेश सिविल सप्लाई कारपोरेशन के एरिया मैनेजर रमाकांत चौहान ने सुन्नी थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप के मुताबिक कर्मचारी सरकारी पद का दुरुपयोग कर चोरी-छिपे लाखों का सीमेंट बेचता रहा। सीमेंट ज्यादा बेचा है और कागजों में बिक्री कम दिखाकर आरोपी लाखों रुपये का गबन कर गया।
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अब एसआईटी कर रही है घोटाले की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में खाद्य आपूर्ति विभाग के सुन्नी डिपो में 54.93 लाख रुपये के सरकारी सीमेंट के गबन मामले में एसआइटी ने जिला मंडी और शिमला के चार विकास खंड अधिकारियों से रिकॉर्ड तलब किया है।
पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित करने के आदेश दिए हैं। इसमें पुलिस अधीक्षक डॉ. मोनिका भुटूंगरु की अगुवाई में एसपी क्राइम वीरेंद्र कालिया, एएसपी साइबर नरवीर राठौर, डीएसपी सिटी मंगत राम और थाना प्रभारी कर्म चंद को एसआई टीम का सदस्य बनाया है। एसआईटी प्रमुख एसपी डॉ. मोनिका ने बताया कि जिला मंडी के सुंदरनगर, करसोग और जिला के बसंतपुर तथा मशोबरा विकास खंड अधिकारियों को नोटिस जारी कर सीमेंट खरीद से संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड तलब किया है।
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सुन्नी डिपो से बसंतपुर, मशोबरा, सुंदरनगर और करसोग विकास खंडों को सीमेंट सप्लाई होता था। इसके अलावा बसंतपुर की 42 पंचायतों, 50 ठेकेदाराें के अलावा आईपीएच और लोक निर्माण विभाग को यहीं से सीमेंट भेजा जाता है। मनरेगा कार्याें के लिए भी यहीं से सीमेंट की सप्लाई होती है। एफआईआर के मुताबिक साल 2016 से 2020 के बीच यह घोटाला हुआ था। ऑडिट में गड़बड़ियां पकड़ने जाने के बाद यह मामला पुलिस को सौंपा था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के कार्यकाल में बेचे सीमेंट का रिकॉर्ड तलब किया था। स्टॉक रजिस्टर और डिपो से किसको कितना सीमेंट आवंटित हुआ तथा डिपो से सीमेंट खरीद करने वालों का रिकॉर्ड मांगा है।
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यह है पूरा मामला
खाद्य आपूर्ति विभाग ने 2020-21 में सुन्नी डिपो का ऑडिट करवाया था तो गड़बड़ियां पकड़ी गईं। आरोपी ने जितना सीमेंट बेचा था उस हिसाब से सरकारी खाते में पैसे जमा नहीं करवाया था। बेचे गए सीमेंट का रिकॉर्ड रजिस्ट्रर में दर्ज नहीं है। साल 2016 से 2020 तक दुष्यंत कुमार सुन्नी में बतौर पब्लिक डिस्ट्रीब्यूटर हेल्पर (पीडीएच) पद पर कार्यरत था। इसी आधार पर प्रदेश सिविल सप्लाई कारपोरेशन के एरिया मैनेजर रमाकांत चौहान ने सुन्नी थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप के मुताबिक कर्मचारी सरकारी पद का दुरुपयोग कर चोरी-छिपे लाखों का सीमेंट बेचता रहा। सीमेंट ज्यादा बेचा है और कागजों में बिक्री कम दिखाकर आरोपी लाखों रुपये का गबन कर गया।