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चीन के खिलाफ तिब्बत अपनाएगा ये हथकंडा

Sat, 07 Jun 2014 12:22 AM IST
Updated Sat, 07 Jun 2014 12:22 AM IST
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China will adopt this stunt against Tibet

पर्यटन नगरी धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बत सरकार ने तिब्बती लोगों के लिए चीन में बुनियादी स्वतंत्रता दिलाने को अब मिडिल वे एप्रोच अभियान शुरू किया है।

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निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. सांग्ये कहते हैं कि मिडिल वे एप्रोच अभियान तिब्बत के लिए चीन में वास्तविक स्वायत्तता पाने पर केंद्रित है। इस अभियान के अनावरण की विशेषता यह है कि इसे 2010 में चीन के साथ वार्ता टूटने के चार साल बाद शुरू किया गया है।
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यह अभियान चीन में स्वायत्तता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय, युवा वर्ग, कूटनीतिज्ञों, मीडिया और हर वर्ग के लोगों का समर्थन पाने में मदद करेगा।

वेबसाइट, डाक्यूमेंटरी और सोशल मीडिया कैंपेन

China will adopt this stunt against Tibet

मैकलोडगंज में निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. सांग्ये अभियान से जुड़ी जानकारी दस्तावेजों सहित पेश की। इसमें एक वेबसाइट, डाक्यूमेंटरी और सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया गया। अभियान की जानकारी सात भाषाओं में उपलब्ध करवाई गई है।

यह अभियान दुनिया भर के लोगों को निर्वासित तिब्बत सरकार के मध्य मार्ग की नीति के बारे में समझने में मदद करेगा। सांग्ये के अनुसार मध्य मार्ग की नीति को अंतरराष्ट्रीय नेताओं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित विभिन्न चीनी बुद्धिजीवियों ने समर्थन दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।

दलाईलामा को भी दिखाए दस्तावेज

China will adopt this stunt against Tibet

मिडिल वे एप्रोच अभियान के लिए निर्वासित सरकार ने पिछले एक साल में इससे जुड़ी जानकारियों के दस्तावेज तैयार किए। ये दस्तावेज लोगों को बताएंगे कि दलाईलामा और तिब्बतियन निर्वासित सरकार इस नीति पर लंबे समय से टिकी हुई है।

निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री ने अभियान से जुड़े दस्तावेज धर्मगुरु दलाईलामा को भी प्रस्तुत किए। धर्मगुरु दलाईलामा ने अभियान की सफलता के लिए निर्वासित सरकार को आशीर्वाद दिया है। मध्य मार्ग की नीति दलाईलामा और पिछली निर्वासित सरकार ने 1974 में बनाई थी।

दलाईलामा की दूरदृष्टि को उस दौरान चीनी नेता डेंग जिआउपिंग ने भी पुख्ता कर बातचीत की पेशकश की थी। उसके बाद बातचीत के नौ दौर हुए और चार तिब्बती प्रतिनिधिमंडल चीन में गए थे।

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