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Shimla News: गेयटी में बाल साहित्य उत्सव शुरू, बच्चों ने पढ़ीं कविताएं
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समीक्षा के साथ कहानी लिखने के गुर सीखे
धरमू घराटी की कहानी की उत्सव में हुई प्रशंसा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भाषा एवं संस्कृति विभाग और कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में गेयटी थियेटर में शुक्रवार को मीमांसा तृतीया बाल साहित्य महोत्सव शुरू हो गया। इसमें स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में भाग लेने के लिए 300 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण करवाया है।
महोत्सव के पहले दिन प्रेरक कलाकार प्रिया कुरियन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। निर्णायक मंडल में डॉ. दीप्ति पंजी, प्रिंस अभिषेक और एता ठाकुर शामिल रहीं। पहले पुस्तक सत्र में ज्योत्सना अत्रे की मनमोहक रचना द जंगल बुक ऑफ राइम्स कैप्टन सुबू का संचालन प्रधानाचार्य विनीता सूद ने किया। उन्होंने अपनी अनूठी कथा शैली से सत्र में शामिल युवा पाठकों वरही, अमोल, अथर्व और सजल को आकर्षित किया। इसके बाद कविता पाठ सत्र में दिनेश शर्मा ने अपनी काव्य अभिव्यक्तियां साझा कीं। सिटी पब्लिक स्कूल के छात्र पुष्पेंद्र कुमार मोदगिल ने कुछ खोया-खोया सा रहता हूं, कभी जागा कभी सोया रहता हूं कविता पढ़कर वाहवाही बटोरी। इसके बाद पुष्पेंद्र ने दुनिया कविता सुनाई। इसके अलावा इस सत्र में स्वर्ण पब्लिक स्कूल की छात्रा रिद्धिमा ने मेरा हिमाचल कविता सुनाई।
दूसरे पुस्तक सत्र में लेखक किशन श्रीमान ने अपनी पुस्तक देव नगरी का परिचय दिया। यह किताब कुल्लू की संस्कृतियों और कहानियों पर आधारित है। इस सत्र का संचालन विचित्र अजय ने किया। इस दौरान युवा समीक्षक स्नेहा हरनोट ने लेखक से सवाल पूछा कि इस किताब में मुख्य कहानी के अलावा जो छोटी-छोटी कहानियां हैं, उनके लिखने का आपका क्या उद्देश्य था। लेखक ने इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जिस समय मैंने यह कहानी लिखी है उस समय लोग एक साथ सहते थे, लेकिन आज जमाना बदल गया है। ऑकलैंड बॉयज स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र शौर्य ने देवनगरी की समीक्षा करते हुए कहा कि इस किताब में धर्मू घराटी की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी है। इसमें धर्मू घराटी और एक दानव की कहानी बताई जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई। मनोहर लाल ने भी इस किताब की समीक्षा की। इसके बाद प्रीति शर्मा असीम ने भारत की संस्कृति बारे चर्चा की। सत्र का संचालन विचित्र अजय ने किया। युवा पाठक मनीषा शर्मा, तरुण शर्मा और सचिन शर्मा रहे। महोत्सव में 15 से अधिक स्कूल भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक मंजीत शर्मा और कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष वंदना भागड़ा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने किया प्रदर्शन
दोपहर बाद कला पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इसका नेतृत्व उपासना बिष्ट ने प्रिया कुरियन के साथ किया। इसके बाद सभी ने नवोदित कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। इसमें दूसरी से चौथी कक्षा, पांचवीं से सातवीं, आठवीं से दसवीं, ग्यारहवीं से बारहवीं और कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसके बाद आलोक सिंह के नेतृत्व में वर्ड प्ले वर्कशॉप हुई। इसमें तीन छात्रों की 12 टीमों ने भाग लिया।
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धरमू घराटी की कहानी की उत्सव में हुई प्रशंसा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भाषा एवं संस्कृति विभाग और कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में गेयटी थियेटर में शुक्रवार को मीमांसा तृतीया बाल साहित्य महोत्सव शुरू हो गया। इसमें स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में भाग लेने के लिए 300 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण करवाया है।
महोत्सव के पहले दिन प्रेरक कलाकार प्रिया कुरियन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। निर्णायक मंडल में डॉ. दीप्ति पंजी, प्रिंस अभिषेक और एता ठाकुर शामिल रहीं। पहले पुस्तक सत्र में ज्योत्सना अत्रे की मनमोहक रचना द जंगल बुक ऑफ राइम्स कैप्टन सुबू का संचालन प्रधानाचार्य विनीता सूद ने किया। उन्होंने अपनी अनूठी कथा शैली से सत्र में शामिल युवा पाठकों वरही, अमोल, अथर्व और सजल को आकर्षित किया। इसके बाद कविता पाठ सत्र में दिनेश शर्मा ने अपनी काव्य अभिव्यक्तियां साझा कीं। सिटी पब्लिक स्कूल के छात्र पुष्पेंद्र कुमार मोदगिल ने कुछ खोया-खोया सा रहता हूं, कभी जागा कभी सोया रहता हूं कविता पढ़कर वाहवाही बटोरी। इसके बाद पुष्पेंद्र ने दुनिया कविता सुनाई। इसके अलावा इस सत्र में स्वर्ण पब्लिक स्कूल की छात्रा रिद्धिमा ने मेरा हिमाचल कविता सुनाई।
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दूसरे पुस्तक सत्र में लेखक किशन श्रीमान ने अपनी पुस्तक देव नगरी का परिचय दिया। यह किताब कुल्लू की संस्कृतियों और कहानियों पर आधारित है। इस सत्र का संचालन विचित्र अजय ने किया। इस दौरान युवा समीक्षक स्नेहा हरनोट ने लेखक से सवाल पूछा कि इस किताब में मुख्य कहानी के अलावा जो छोटी-छोटी कहानियां हैं, उनके लिखने का आपका क्या उद्देश्य था। लेखक ने इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जिस समय मैंने यह कहानी लिखी है उस समय लोग एक साथ सहते थे, लेकिन आज जमाना बदल गया है। ऑकलैंड बॉयज स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र शौर्य ने देवनगरी की समीक्षा करते हुए कहा कि इस किताब में धर्मू घराटी की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी है। इसमें धर्मू घराटी और एक दानव की कहानी बताई जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई। मनोहर लाल ने भी इस किताब की समीक्षा की। इसके बाद प्रीति शर्मा असीम ने भारत की संस्कृति बारे चर्चा की। सत्र का संचालन विचित्र अजय ने किया। युवा पाठक मनीषा शर्मा, तरुण शर्मा और सचिन शर्मा रहे। महोत्सव में 15 से अधिक स्कूल भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक मंजीत शर्मा और कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष वंदना भागड़ा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने किया प्रदर्शन
दोपहर बाद कला पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इसका नेतृत्व उपासना बिष्ट ने प्रिया कुरियन के साथ किया। इसके बाद सभी ने नवोदित कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। इसमें दूसरी से चौथी कक्षा, पांचवीं से सातवीं, आठवीं से दसवीं, ग्यारहवीं से बारहवीं और कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसके बाद आलोक सिंह के नेतृत्व में वर्ड प्ले वर्कशॉप हुई। इसमें तीन छात्रों की 12 टीमों ने भाग लिया।