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डाक्टरों ने एचआईवी पीड़ित बच्चे को बना दिया ‘अछूत’

Wed, 04 Mar 2015 04:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 04 Mar 2015 04:03 PM IST
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Children suffering from HIV misconducted in igmc shimla.

डाक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है। लेकिन अगर डाक्टर ही मरीज से अछूत से व्यवहार करने लगे तो क्या होगा? ऐसा ही एक वाक्या आईजीएमसी अस्पताल के बाल रोग विभाग में सामने आया है।

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यहां उपचार के लिए आए एक दस साल के लड़के को जनरल वार्ड से हटाकर आइसोलेशन में रख दिया। यह बच्चा एचआईवी से पीड़ित है।

प्रत्येक जागरूक नागरिक को इस बात की जानकारी है कि एचआईवी एक साथ रहने या छूने से नहीं फैलता। इन्हें भी सामान्य लोगों के बीच रहने का हक है और इनके प्रति किसी तरह का कोई पक्षपात पूर्ण रवैया नहीं रखा जा सकता।
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बावजूद इसके आईजीएमसी के डाक्टरों ने बच्चे को अलग रखकर साबित कर दिया है कि करनी और कथनी में कितना फर्क है। यही डाक्टर जब किसी मंच पर चढ़ते हैं तो कहते हैं कि एचआईवी से पीड़ित लोगों से दूर रहने की जरूरत नहीं।
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यह छूने या साथ रहने से नहीं फैलता। उधर, मीडिया से मामले की जानकारी मिलने के बाद बाल रोग महकमा कुछ भी बोलने को फिलहाल तैयार नहीं है। इतना जरूर मान रहे हैं कि एचआईवी से पीड़ित बच्चे को अलग रखना नियमों के खिलाफ है।

एचआईवी पीड़ित के अधिकार

Children suffering from HIV misconducted in igmc shimla.

-एचआईवी पीड़ितों से अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी, अन्य मरीज या मरीजों के परिजनों की ओर से भेदभाव नहीं किया जा सकता।

-धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर जिस प्रकार भेदभाव नहीं किया जा सकता। उसी प्रकार एचआईवी संक्रमण के आधार पर सार्वजनिक उपयोग के स्थानों, जनसेवाओं एवं लोक नियोजन के क्षेत्र में भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।

-एड्स की जांच पूरी तरह से गुप्त और निशुल्क है।

-एचआईवी प्रतिरोधक उपचार एवं दवाइयां निशुल्क उपलब्ध हैं।

-अधिकारों का हनन होने पर पीड़ित राज्य एड्स नियंत्रण समिति, राज्य मानव अधिकार आयोग से शिकायत कर सकता है।

आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। बुधवार को पता करने के बाद ही वह टिप्पणी कर पाएंगे।

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