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Shimla News: छलांडा-पीरन सड़क पर गड्ढों की भरमार, हादसे का खतरा

Tue, 28 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 11:59 PM IST
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Chhalanda-Piran road riddled with potholes; risk of accidents.
सड़क का दस किमी हिस्सा गड्ढों में बदला, लोग हो रहे परेशान
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लोगों का आरोप, गर्मी के मौसम में भरने चाहि थे गड्ढे
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। जुन्गा तहसील के तहत आने वाली छलांडा-पीरन सड़क के आंजी से पीरन और खालटू तक का करीब दस किलोमीटर लंबा हिस्सा खस्ताहाल हो गया है।
सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं। इससे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग ने गर्मी के मौसम में भी इस सड़क के गड्ढों को नहीं भरा। अब बरसात में ये गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी राजीव शर्मा, प्रीतम सिंह ठाकुर, मनोहर सिंह ठाकुर, दया राम वर्मा और जबर सिंह ठाकुर का कहना है कि पिछले दो वर्षों से सड़क की कोई मरम्मत नहीं हुई है। अब स्थिति यह हो गई है कि सड़क में गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क दिखाई देती है। गहरे गड्ढों के कारण छोटी गाड़ियों के चेंबर और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नारिगा पुल से जघेड़ तक पड़ने वाले खतरनाक ढांक वाले हिस्से में करीब 30 वर्षों से न तो क्रैश बैरियर लगाए हैं और न ही पैराफिट का निर्माण किया गया है।

टमाटर और अन्य सब्जियों से लदे वाहन अक्सर इस चढ़ाई वाले मार्ग पर फंस जाते हैं, जिससे कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। लोगों ने कहा कि नारिगा पुल के पास स्थित तीखे मोड़ों (कैंचियों) पर भी सुरक्षा के लिए कोई क्रैश बैरियर नहीं लगाया गया है। वाहन चालकों को इन मोड़ों पर बेहद सावधानी से वाहन निकालना पड़ता है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग और प्रदेश सरकार से सड़क की तत्काल मरम्मत करवाने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।
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दो साल पहले भेजा है प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग जुन्गा के कनिष्ठ अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि धनराशि की कमी के चलते आंजी से पीरन और खालटू तक सड़क के हिस्से को पक्का नहीं किया जा सका है। नारिगा पुल के पास कैंचियों और ढांक वाले हिस्से में क्रैश बैरियर लगाने के लिए 30 लाख रुपये का प्रस्ताव दो वर्ष पहले सरकार को भेजा गया है। इसे मंजूरी मिलने का इंतजार है।
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