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चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट विवाद: सीएस संजय गुप्ता बोले- दो पूर्व मुख्य सचिव रच रहे मेरे खिलाफ साजिश

Tue, 31 Mar 2026 03:12 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 31 Mar 2026 03:12 PM IST
सार

चेस्टर हिल जमीन खरीद पर मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने भ्रष्टाचार के आरोप खारिज किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस जमीन को लेकर उन पर आरोप लगाया जा रहा है, वह उनकी मुख्य सचिव के रूप में नियुक्ति से पहले ही खरीदी जा चुकी थी। पढ़ें पूरी खबर...

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Chester Hills Project Controversy Chief Secretary Sanjay Gupta Dismisses Allegations Find Out What He Said
मुख्य सचिव संजय गुप्ता प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने चेस्टर हिल मामले में दो पूर्व मुख्य सचिवों को लपेटते हुए कहा कि आरडी धीमान और प्रबोध सक्सेना उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। गुप्ता बोले- मुझे एक्सटेंशन या ताजा नियुक्ति न मिले, इसलिए धीमान और सक्सेना ने प्रपंच रचा है। मुख्य सचिव ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में पत्रकार वार्ता कर दोनों को निशाने पर लिया। गुप्ता ने कहा कि जब वह मुख्य सचिव नहीं थे, उस समय उन्हें सरकार से जमीन खरीद की अनुमति मिली थी। उन्होंने इसे खरीदने के लिए 75 लाख जीपीएफ से निकाले। गुप्ता बोले - मैं किसी गुट में नहीं हूं और सीएम को रिपोर्ट करता हूं। विजिलेंस, सीबीआई और ईडी के मामलों में फंसे इन दोनों अधिकारियों की निष्ठा संदिग्ध है। मुख्यमंत्री ने ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाने का विधानसभा में आश्वासन दिया है। गुप्ता ने कहा कि भाजपा के नेता इन संदिग्ध निष्ठा वाले अफसरों के नाम मुख्यमंत्री को देंगे तो वह कार्रवाई करेंगे।

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अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए गुप्ता ने कहा कि दोनों के खिलाफ विजिलेंस, ईडी और सीबीआई जांच चल रही है। अधिवक्ता विनय शर्मा की शिकायत बेबुनियाद है। पूरे मामले के पीछे ये अधिकारी हैं। गुप्ता ने कहा कि सीएम के आश्वासन के बाद प्रबोध सक्सेना के ओडीआई मामले में ऊर्जा सचिव राकेश कंवर से भी रिपोर्ट मांगी गई है। अधिवक्ता विनय शर्मा ने छोटा शिमला थाने में शिकायत कर उन पर तीन एकड़ जमीन घूस लेकर खरीदने का निराधार आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह जमीन 1 करोड़ 38 लाख रुपये में खरीदी। कलेक्टर रेट एक करोड़ दस लाख रुपये का है। उन्होंने जून 2025 में अपना जीपीएफ निकाला। उन्होंने इसकी प्रति भी दिखाई।
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शिकायत में प्रिवेंशन टू करप्शन एक्ट की धारा 13 (1)डी-ए के तहत कार्रवाई को लिखना गलत है। यह धारा डिलीट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जब वह बिजली बोर्ड के अध्यक्ष थे तो उन्होंने बोर्ड के लिए 500 करोड़ का लाभ कमाया। इसकी वजह से मुख्यमंत्री ने उनका काम देखते हुए उन्हें मुख्य सचिव लगाया। कुछ अधिकारियों को इससे तकलीफ हो रही है कि यह कैसे हो गया, क्योंकि 3700 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था। गुप्ता ने कहा कि पूर्व सीएमडी आरडी धीमान और एक अधिकारी ग्रोवर के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो में दो एफआईआर दर्ज हैं। यह मामला ईडी ने भी टेकओवर कर लिया है।

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एक मामला गिलवर्ट इस्पात मामले में 10 से 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। दूसरा 130 करोड़ रुपये की लाइन रेगुलेटर के ऑर्डर के वाॅयलेशन में कुनिहार नालागढ़ लाइन बनाने का है। जांच चल रही है। आरडी धीमान के खिलाफ एक एक्सईएन ने जबरदस्ती करवाने का कोर्ट में बयान दे दिया है। भाजपा और माकपा को भी गलत तथ्य दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला रेरा से भी अप्रूव है। यह बात रेरा के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी से भी पूछी जानी चाहिए, जिन्होंने एप्रूव किया। जब इतनी हेराफेरी थी तो रेरा ने इसे कैसे अप्रूव किया। नक्शों का आदेश देवेश कुमार ने दिया था। इसे आयुक्त ने नहीं माना तो मामला सरकार के पास दोबारा आया।
 

अपने ऊपर लगे आरोपों को मोड़ रहे मुख्य सचिव : सक्सेना
बिजली बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए आरोपों का यह मामला दो बार हाईकोर्ट में जा चुका है। दोनों बार ही खारिज हो चुका है। मामला हाईकोर्ट से डिसमिस होने के बाद प्रधानमंत्री उन्हें मुख्य सचिव पद पर एक्सटेंशन भी दे चुके हैं। अपने ऊपर लगाए आरोपों को मोड़ने के लिए मुख्य सचिव इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।

ध्यान डायवर्ट करने के लिए कर रहे ऐसी बातें : धीमान
रेरा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान ने कहा कि वह 2011-12 में सीएमडी थे तो उस वक्त की बात कर रहे हैं। बिजली बोर्ड में जो भी फैसले होते हैं वह व्यक्तिगत तौर पर नहीं लिए जाते हैं। इसे निदेशक मंडल लेता है। उन्होंने जनहित को ध्यान पर रखकर ही काम किया। मुख्य सचिव अपने ऊपर लगे आरोपों से ध्यान डायवर्ट करने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। इस बारे में कोई भी जांच कर लें, मगर उन्होंने निष्ठा से काम किया है।

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